भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मिशन 2019 के लिए हरियाणा के जींद में 15 फरवरी को मोटरसाइकिल रैली करने वाले हैं। इसका अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने विरोध किया है, इसके अलावा जाटों ने 18 फरवरी को बलिदान दिवस मनाने का ऐलान किया है।

वहीं समिति के अध्यक्ष यशपाल मालिक ने अमित शाह के रैली स्थल के पास ही अपनी रैली करने की तैयारी शुरू कर दी है। जाटों के साथ-साथ आईएनएलडी और कांग्रेस भी शाह के दौरे का विरोध कर रहे हैं।

जाटों और विपक्ष के द्वारा शाह के दौरे के विरोध को लेकर खुफिया एजेंसियों ने सरकार से उनका दौरा टालने को कहा है। शाह की सुरक्षा के लिए खट्टर सरकार ने केंद्र से अर्धसैनिक बलों की 150 कंपनियों की मांग की और केंद्र ने राज्य सरकार की मांग मान भी ली है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक 14 फरवरी को अर्धसैनिकों बलों की कंपनियां हरियाणा में तैनात हो जाएँगी।

केंद्र द्वारा अमित शाह की रैली के लिए अर्धसैनिक बलों की 150 कंपनियों की तैनाती को लेकर वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने तंज किया है। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान को लेकर ट्विटर पर लिखा “हरियाणा रैली में 150 कम्पनियाँ अमित शाह की सुरक्षा के लिए चाहिए? संघ की ‘सेना’ भेजो न?”

सवाल यह उठता है कि एक राजनीतिक पार्टी की रैली के लिए देश की सुरक्षा में में तैनात अर्धसैनिक बलों की 150 कंपनियों को भेजना सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाना नहीं होगा?

वो भी ऐसे समय में जब देश की सीमा पर आतंकवादी हमलों से लेकर नक्सली हमले हो रहे हैं। सरकार अपनी पार्टी बीजेपी के लिए देश के खजाने का दुरुपयोग कर रही है।

Loading...
loading...