पानी का संकट भारत समेत विश्व की मुख्य समस्याओं में से एक है। देश में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। मॉनसून के दौरान कई इलाकों में अपर्याप्त बारिश होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। देश में पानी का संकट बढ़ रहा है।

लेकिन यह दावा किया जा रहा है कि जल्द ही भारत में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी, सोशल मीडिया पर भी ये वायरल हो रहा है। दावा इज़रायल और भारत सरकार के बीच तीन साल पहले हुए एक समझौते की ख़बर के हवाले से किया जा रहा है।

समझौते के तहत डिसैलिनेशन (विलवणीकरण) तकनीक को भारत लाया जाएगा। इसके ज़रिए समुद्र के पानी को खेती जैसे कार्यों और पीने के योग्य बनाया जाता है।

ये भी कहा जा रहा है कि ऐसा तकनीक भारत में पहली बार आ रही है। इसका श्रेय पीएम मोदी को दिया जा रहा है। यह दावा भाजपा समर्थित पोस्टकार्ड वेबसाइट पर किया जा रहा है। लेकिन ये पहली बार का वादा वैसे ही है जैसे रो-रो फैरी के समय किया गया था।

तमिलनाडु में पहले से दो प्लांट मौजूद हैं जहां समुद्र के पानी को सामान्य जल में परिवर्तित किया जा रहा है। एक प्लांट मिंजुर में है और दूसरा नेमेली में। मिंजुर सीवॉटर डिसैलिनेशन प्लांट 2010 में शुरू हुआ और नेमेली सीवॉटर डिसैलिनेशन प्लांट 2013 में। मिंजुर स्थित प्लांट तो 2009 में ही शुरू होना था।

साफ़ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई 2017 के इज़रायल दौरे से काफ़ी पहले देश में खारे पानी को मीठा बनाने की तकनीक पर काम शुरू हो चुका था। जहां तक पानी की सभी समस्याओं से छुटकारा मिलने की बात है तो विशेषज्ञों के मुताबिक़ यह तकनीक नाकाफ़ी है।

उनका मानना है कि डिसैलिनेशन से पानी की समस्या को कुछ हद तक ही दूर किया जा सकता है और यह हद भी पीने के पानी के संबंध में लागू होती है।

देश के बड़े हिस्से में खेती की जाती है और डिसैलिनेशन तकनीक के ज़रिए उसकी ज़रूरत जितना पानी प्राप्त नहीं किया जा सकता।

 

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