राजनीती में लोग सत्ता तक पहुँचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते है और शायद ऐसा कोई ही नेता होगा जो किसी को न्याय दिलाने के लिए विधान सभा में विपक्ष के नेता जैसा बड़ा पद भी ठुकरा दे। लेकिन ऐसा किया पंजाब से आम आदमी पार्टी के विधायक एचएस फूलका ने राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष के पद से इस्तीफ़ा देकर।

आप विधायक फूलका ने अपने इस कदम के पीछे वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की ओर से केस लड़ने को वजह बताया है.

अपना इस्तीफा पंजाब विधानसभा के स्पीकर को देने के बाद एचएस फुल्का ने कहा कि , ‘मेरी 33 वर्षों की 1984 दंगा पीड़ितों के साथ की गई सेवा के बदले में लोगों ने मुझे एमएलए बनाया है और मैं सिर्फ एक कैबिनेट पद के लिए लोगों धोखा दूं यह बात ठीक नहीं है’

उन्होंने कहा इसलिए मैंने आज विधानसभा के नेता विपक्ष के रूप में अपना इस्तीफ़ा स्पीकर को सौंप दिया है. मैंने 1984 दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाना है और जब तक इंसाफ नहीं  मिलता मैं चैन से नहीं बैठूँगा।

फूलका नेता विपक्ष होते हुए बतौर वकील ये केस लड़ते तो ऑफिस ऑफ़ प्रॉफिट का मामला बनता लेकिन फूलका दंगा पीड़ितों का केस लड़ने में रुकावट बन रहे नेता विपक्ष के पद को लात मार दी।

Loading...
loading...