सेबी ने प्राइस वॉटरहाउस को किसी भी लिस्टेड कंपनी के ऑडिट करने से दो वर्ष की पाबंदी लगा दी है। सेबी ने प्राइस वॉटरहाउस पर यह पाबंदी सत्यम कंपनी के घोटाले में कथित रूप से मिलीभगत के कारण लगाई है। इसके साथ ही सेबी ने कंपनी को जनवरी 2009 से अबतक 13 करोड़ रुपए सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का भी आदेश दिया है।

प्राइस वॉटरहाउस पर इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी मोदी सरकार ने कंपनी को अपने एडवाइज़र पैनल से नहीं निकाला है।

प्राइम डाटाबेस के मुताबिक प्राइस वॉटरहाउस, परामर्शदात्री फर्म पीडब्ल्यूसी इंडिया की ऑडिटिंग शाखा है। भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 77 कंपनियों की ऑडिटर है।

क्या है मामला

सेबी ने बुधवार को 108 पेज के अपने आदेश में प्राइस वॉटरहाउस पर दो साल का प्रतिबन्ध लगा दिया है। ये प्रतिबन्ध कंपनी पर 8000 करोड़ के सत्यम घोटाले में कथित रूप से शामिल होने के कारण लगाया गया है। इन सबके अलावा सेबी ने PWC के दो पुराने पार्टनर्स एस गोपालकृष्णन और श्रीनिवास तल्लौरी पर भी 3 साल का बैन लगाया है। इन दोनों के नाम भी सत्यम घोटाले में आए थे। 2009 में जिस समय सत्यम घोटाला सामने आया था, उस समय इन दोनों अधिकारियों ने ही सत्यम के खातों की ऑडिटिंग की थी।

मोदी सरकार ने कंपनी को बनाया सलाहकार

मोदी सरकार ने प्राइस वॉटरहाउस को कई सरकारी कंपनियों में सलाहकार बना रखा है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान में प्राइस वॉटरहाउस को सलाहकार के रूप में नियुक्त कर रखा है। इसके लिए सरकार कंपनी को सालाना करोड़ो का भुगतान भी करती है। प्राइस वॉटरहाउस को देश की सरकारी पेट्रोलियम और गैस कंपनियों में भी सलाहकार बनाया गया है।

 

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