देश के जानेमाने उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी को नॉन परफोर्मिंग एसेट (एन.पी.ए) घोषित कर दिया गया है। कंपनी पर सार्वजानिक यानि सरकारी बैंकों का 9,000 करोड़ का कर्ज़ है।

एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होता। इस कर्ज़ में 90% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है। अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एनपीए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के विजया बैंक ने अनिल अंबानी समूह की अगुवाई वाली रिलायंस नैवल एंड इंजीनियरिंग के ऋण खाते को मार्च तिमाही से एन.पी.ए घोषित कर दिया है। पहले इस कंपनी का नाम पीपावाव डिफेंस एंड आफशोर इंजीनियरिंग था।

अनिल अंबानी ग्रुप ने 2016 में इसका अधिग्रहण किया था और इसे रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग का नाम दिया था। कंपनी पर आईडीबीआई बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के गठजोड़ का 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है। इनमें से ज्यादातर सरकारी बैंक हैं।

इसके बावजूद सरकार की तरफ कंपनी के खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठा पा रहा है। इसके बदले सरकार अनिल अम्बानी की कंपनियों को बड़े ठेके दे रही है। ये भी आरोप लग रहा है कि मोदी सरकार कर्ज़े में दबे अनिल अम्बानी की मदद कर रही है।

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