फिल्म और अंदाज़ के लिए जाने-जाने वालें फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने इस बार देशभक्ति पर बनने वाली फिल्मों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, हम देशभक्त और देशद्रोह के मामले में ऐसा फंस गए कि ‘हमें फ़िल्में भी वैसी दिखाई जाने लगी है’। जिसमें एक देशभक्त तो ज़रूर होता और हम उसे देखकर खुश हो जाते की ‘वाह हमने देशभक्ति कर ली’ मगर असल में देशभक्ति भी बाज़ार का हिस्सा बन चुका है जिसे आप बेच और खरीद सकते है और जो इसके खिलाफ बोलेगा वो देशद्रोही होगा ।

दरअसल अनुराग कश्यप अपनी नई फिल्म जो बॉक्सिंग पर आधारित मुक्काबाज़ है। उसी सिलसिले में पत्रकारों से बात कर रहें थे। जिसमें उन्होंने खिलाड़ियों की जिंदगी पर बोलते हुए कहा कि हमारा ही देश ऐसा है जहां परर्फोर्मस से पहले कास्ट देखी जाती है।

बायोपिक पर बात करते हुए अनुराग ने कहा कि, हम देशभक्ति बेचते है, सब इस बाज़ार को देशभक्ति का नाम देते है और जो उसपर सवाल खड़ा करता है उसे देशद्रोही कहने लग जाते है। जिसे हम बायोपिक कहते है वो खिलाड़ी का जीवन होता है न की देशभक्ति क्योकिं राजनीति अपना श्रेय लेने तब आती है जब सिन्धु या मेरी कॉम जैसा कोई खिलाड़ी जीत आकर आता है, ये शर्मनाक है।

खेल मतलब सरकारी नौकरी

अनुराग कश्यप ने कहा कि, भारत में खेल लोग जुनून से नहीं लालच से आते है। हर राज्य से लोग खेल में सिर्फ इसलिए आते है की उन्हें नौकरी मिल जाए और सेट हो सके।

फ़िल्में अगर समाज पर इतना ही असर डालती तो देश में आज प्यार होता

जब एक पत्रकार ने अनुराग से पूछा कि, आप पद्मावती फिल्म विवाद पर क्या कहेंगे तो अनुराग भी इस सवाल के पीछे का मकसद समझ चुके थे। उन्होंने उसी अंदाज़ में इसका जवाब भी दिया  ।

पद्मावती पर बोलते हुए कहा ‘किसने अधिकार दिया है की फिल्म में छेड़छाड़ हुई इसका फैसला कौन करेगा मैं करूँगा की मीडिया करेगा? या फिर वो करेंगे जो इस काम के लिए बैठे है। अगर कोई फिल्म समाज में कुछ कर पाती तो देश में आज प्यार होता है।

अनुराग कश्यप की फिल्म मुक्काबाज़ एक मुक्केबाज़ की कहानी है। जिसे उन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर उतरने की कोशिश है, फिल्म 12 जनवरी को रिलीज़ होगी मगर उससे पहले अनुराग कश्यप ने जो भी मुद्दे उठाये वो काफी अहम मुद्दे है, ऐसा जोखिम शायद ही कोई निर्देशक फिल्म रिलीज़ से पहले करें। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी साफ़ किया की ये फिल्म देशभक्ति नहीं समाज को आईना देखना वाली फिल्म है, उससे ज्यादा कुछ नहीं।

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