गलत है उनकी बात पर चर्चा करना। सबसे पहले चर्चा की ज़ी न्यूज़ ने फिर बाकि सबने शुरू कर दी आलोचना। ठीक मालदा की तरह, जेएनयू की तरह। असद ने बोला था तो सुन कर सन्नाटा थाम लेते पर आप तो मशाल थाम बैठे।

मीडिया असदउद्दीन को दिखाएगी, वह ज़ोरशोर से इस बात को प्रचारित करेगी की उवैसी ऐसा कह रहे हैं। फिर क्या होगा? फिर होगा ये कि बीजेपी लपकेगी। दोनों एक दूसरे के लिए खाद और पानी हैं। पर आप तो समझदार हैं न। उलट दीजिए दोनों को। जो ये दोनों कहें आप उसके उल्टा कहिए।

पर नहीं, आपको तो लंबा सा चिट्ठा लिखना आता है। चिट्ठा लिख कर कुर्सी पर चौड़ा होना आता है। मीडिया आम हिंदुओं को क्यों नहीं टार्गेट करके ख़बर चला रही है? क्यों वह बार बार मुसलमानों को उठा कर ला रही है?

उसे पता है इस देश में मुसलमान यदि किसी मुद्दे के बीच ठेल दिया गया तो वह मुद्दा भले ही कितना सही हो, वह गलत हो जाता है। क्योंकि हमने समाज ही ऐसा बना लिया है। मुसलमानों को विमुद्रीकरण से बराबर की परेशानी उठानी पड़ रही है सबको पता है। आपके बताने से ही यह बात सबको मालूम चलेगी।

असदउद्दीन ओवैसी मुसलमानों के नेता नहीं हैं। होते तो बिहार में उनकी पार्टी की बुरी तरह हार मुस्लिम बाहुल्य सीट पर न होती। आपका सेक्यूलरिज्म कहीं ओवैसी का विरोध करते करते मुस्लिम विरोध में न बदल जाए इसका खास ख्याल रखें। वरना मोदी का विरोध देश की बड़ी हिंदू आबादी को हिंदू धर्म का विरोध लगता ही है।

आपने ही ऐसा किया है। अब लिखना पड़ता है मोदी विरोध, हिंदू विरोध नहीं है। बड़ी महीन रेखा है यह। ज्यादा बकैती करने वालों को यह दिखती नहीं। असदउद्दीन ओवैसी ने बैंक खुलने, कर्ज देने, अधिक जनसंख्या पर कम बैंकिग सुविधाओं पर नाराज़गी ज़ाहिर की है।

यदि आपको लगता है कि मुसलमानों और उनके इलाकों में यह सारी सुविधाएं और सेवाएं बहुत बेहतरीन है तभी आप ओवैसी का विरोध करें। वरना मैं आपकी ‘असुरक्षा वाली राजनीति’ की चिंदी चिंदी कर दूंगा।

यह पोस्ट युवा पत्रकार मोहम्मद अनस की फेसबुक से लिया गया है। जिसे बोलता हिंदुस्तान के सोशल वाणी में जगह दी गई है।