साल 2013 में दंगों ने मुजफ्फनगर की सांप्रदायिक एकता के ताने-बाने को भले ही छिन-भिन्न क्यों न किया हो, लेकिन आज यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिल रही है।

सावन के महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा मुजफ्फनगर से होकर गुजरती है। लाखों शिव भक्त इस रास्ते से गुजरते हैं। इन्हीं शिव भक्तों की सेवा के लिए हर साल यहां के मुस्लिम जुटे रहते हैं। ‘पैग़ाम-ए-इंसानियत’ नाम से कावंड शिविर लगाकर, ये लोग हज़ारों शिवभक्तों को खाने-पीने का सामान बांट रहे हैं।

दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा के हज़ारों शिवभक्तों के लिए यहां आराम करने के लिए कुर्सियां भी लगाई गईं हैं। इस शिविर का संचालन आसिफ राही और दिलशाद पहलवान कर रहे हैं। इन दोनों का कहना है कि यहां हम हज़ारों शिव भक्तों की सेवा करते हैं, ताकि समाज में सौहार्द और इंसानियत का संदेश दे सकें।

आशिफ और दिलशाद ने बताया कि, वो पिछले 20 सालों से शिव भक्तों की सेवा कर रहे हैं। वो शिव भक्तों को फ्रूटी, पानी, फल, बिस्किट और दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके मरहम आदि का इंतजाम इस शिविर में करते हैं।

शिविर संचालक आशिफ और दिलशाद का कहना है कि, शिव भक्त हमारी मोहब्बत के कारण यहां रुकते हैं। इंशा अल्लाह ये मोहब्बत हज़ारों सालों तक यूं ही बनी रहे।

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