आज़ादी की लड़ाई में अपनी जान निछावर करने वालें भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का नाम के आगे शहीद ही लगाया जाता है। मगर भारत सरकार उन्हें शहीद का दर्जा देने से इंकार करती है।

ये खुलासा हुआ है एक आरटीआई से जिसे रोहित चौधरी ने इंडियन कौंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च (आइसीएचआर) दाखिल कर पुछा था की भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा हासिल है या नहीं है। सरकार की तरफ से जो जवाब मिला वो न की सिर्फ चौकाने वाला बल्कि शर्मनाक भी है।

आरटीआई का जवाब देते हुए आइसीएचआर ने बताया की भारत सरकार ने अभी तक भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा नहीं दिया है।

इतना ही नहीं इससे ज्यादा तो शर्मनाक तब हुआ जब आइसीएचआर ने एक पुस्तक प्रकाशित कर लिखा कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु कट्टर युवा आतंकी थे।

सरकार के अधीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय चलने वालें आइसीएचआर संस्था के बारें में ये ख़बरें अंग्रजी न्यूज़ पोर्टल टाइम्स नाउ में ख़बर को प्रकशित करते हुए ये बताया है।

सवाल जम्‍मू के आरटीआई कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने क्‍या तीनों स्‍वतंत्रता सेनानियों को शहीद का दर्जा दिया गया है? सवाल करने वालें आरटीआई कार्यकर्ता रोहित चौधरी को बताया गया की पिछली तीनों सरकारों से इन युवा क्रांतिकारियों की अनदेखी की गई है।

अक्सर इस मामलें में बवाल होता रहता है मगर सरकार बदल जाती है नहीं बदलता तो भगत सिंह को शहीद बताने का दर्जा न देना।

 

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