अभी उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी का घमासान थमा नहीं था कि अब बिहार के समाजवाद में बगावत सुलगने लगी। यूपी की तर्ज पर यहाँ भी राजद के समाजवाद को किसी की बुरी नजर लग गई।

उत्तर प्रदेश में चाचा-भतीजे की लड़ाई पिता-पुत्र की लड़ाई बन गई। लेकिन बिहार में राजद छात्र के प्रदेश अध्यक्ष अजीत यादव को पद से हटाने पर बवाल मच गया।

छात्र राजद की राजनीति में धाक जमा चुके अजीत यादव को जैसे ही पदमुक्त किया गया। वैसी ही छात्र नेताओं ने इस्तीफे देने शुरू कर दिए।

छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष अजीत यादव के समर्थन में आकर छात्र प्रदेश उपाध्यक्ष राजद नेता महताब आलम ने सबसे पहले राजद की सभी ईकाईयों से अपना इस्तीफा दे दिया।

महताब आलम ने कहा कि, राष्ट्रीय जनता दल के अंदर आन्तरिक लोकतंत्र के ख़त्म होने से खुद को असहज महसूस कर रहा हूँ। मैंने इस पार्टी के अपने निजी कार्यों को हमेशा बलि चढ़ाया है। मेरी आस्था हमेशा से समाजवादी विचारधारा और लोकतान्त्रिक मूल्य और धर्मनिरपेक्षता के साथ जुड़ी रही है।

लेकिन आज पार्टी में यह सब विलुप्त होने से आहत हूं। अजीत यादव को बिना किसी कारण के छात्र अध्यक्ष पद से हटाया गया जो घोर अलोकतांत्रिक मूल्य को बल दे रहा है। मैं अपने साथी अजीत यादव के साथ खड़ा हूँ और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूँ । लेकिन इसके आगे भी लगातार संघर्ष जारी रहेगा।

आपको बता दें कि, सीवान जिले से आने वाले राजद के छात्र प्रदेश उपाध्यक्ष नेता महताब आलम हमेशा छात्रों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। उनके संघषों की हमेशा सराहना की जाती रही है। वह बिहार की राजद छात्र राजनीति में रहकर हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रोहित वेमुला के लिए लड़े व एएमयू से लेकर जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद के लिए आवाज उठाते रहे हैं।

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