ये सिर्फ चार फर्जी तस्वीरें हैं, ऐसी ही न जाने कितनी फर्जी फोटो भाजपा का आईटी सेल रोज़ छाप रहा है।

भाजपा के बड़े नेता इन तस्वीरों को शेयर कर रहे हैं। बेहद बेशर्म ब्रीड की ये पार्टी आजकल “भारत जलाओ पार्टी” से “बंगाल जलाओ पार्टी” बनी हुई है।

फर्जी फोटो छापते हैं, कैप्शन में लिखते हैं कहाँ गए अवार्ड वापसी वाले, कहाँ गए जुनैद पर शोर मचाने वाले।

हद तो ये हो गयी है की बीजेपी की नूपुर शर्मा गुजरात 2002 के नरसंहारों की तस्वीरों को बंगाल की तस्वीरें फोटोशॉप कर पोस्ट कर रही हैं। इतने ज़्यादा मक्कार शायद ही दुनिया में कहीं मिलें।

दरअसल ये चाहते हैं की बंगाल ऐसा बन जाए जैसा ये फर्जी तस्वीरों में दिखा रहे हैं। जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है की पूरी तरह से शान्ति बहाल करे, साथ ही भाजपाई जालसाज़ों को रोके।

दूसरा अंश

2019 के चुनावों में भाजपा को सबसे बड़ा चैलेंज बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और केरल से ही मिलने वाला है। 2014 के तमाम आंधी तूफ़ान और सुनामी के बावजूद बिहार को छोड़कर बाकी तीनों राज्यों में बुरी हार मिली थी।

लालू- नीतीश-कांग्रेस गठबंधन होने के बाद बिहार भी इन तीनों राज्यों जैसा ही मुश्किल है। इसीलिए बीजेपी ने इन राज्यों के लिए अलग अलग स्ट्रेटेजी बनायी है। बिहार की स्ट्रेटेजी ये है की लालू यादव पर इतने छापे डलवाये जाएँ की नितीश अलायन्स तोड़ने पर मजबूर हो जाए, फिर नितीश भाजपा के साथ आएं या ना आयें, भाजपा की जीत बिहार में पक्की है।

बंगाल को सीधा नफरत और साम्प्रदायिक ज़हर के तहत जीतना है, असम में polarization का ये एक्सपेरिमेंट सफल हो चूका है। तमिलनाडु में पन्नीरसेल्वन या रजनीकांत के सहारे हैं। पढ़े लिखे केरल में इनका शायद ही कुछ हो पाए।

लेखक- मोहम्मद काशिफ

नोट- यह लेखक के अपने विचार है। इसको बोलता हिंदुस्तान ने सोशल वाणी में जगह दी है।

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