बीजेपी शासित राजस्थान के अलवर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. करण सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. जसवंत सिंह यादव पर जीत लगभग तय कर ली है। ”लगभग” इसलिए क्योंकि अंतिम परिणाम आना अभी बाकी है। और जीत इसलिए तय है क्योंकि कांग्रेस उम्मीदावर डॉ. करण सिंह यादव कई हजार वोटों से आगे चल रहे हैं।

अपने शासन वाले राज्य में हार के बाद बीजेपी इस मंथन में लगी है कि हार आखिर हुई कैसे? पद्मावत के हंगामा को शह देने, कोर्ट पर भगवा फहराने, बीफ के नाम पर लिंचिंग की घटनाओं के बाद भी आखिर बीजेपी हार कैसे गई? पिछले साल से ही बीजेपी ने राजस्थान की राजनीति में हिंदुत्व की हवा भरनी शुरू कर दी थी। 2011 के जनगणना के मुताबिक अलवर हिंदु बाहुल्य क्षेत्र भी है। बावजूद इसके बीजेपी को चुनाव हारना पड़ा, क्यों?

क्योंकि आकड़ों के मुताबिक, अलवर के मुस्लिम समुदाय ने अपना पूरा समर्थन कांग्रेस को दे दिया। ऐसा करने के पीछे अलवर के मुस्लिम समुदाय के पास कई वाजिब वजह भी थी। अप्रैल 2017 से लेकर अब तक अलवर में बीफ के नाम पर 3 मुसलमानों की मौत की जा चुकी है। पिछले दस माह की घटनाओं को देखें तो अलवर गाय संबंधित हिंसा का केंद्र रहा है।

पहलू खान- 1 अप्रैल, 2017 गो-तस्करी के आरोप में मुस्लिम पशुपालक किसान को नेशनल हाइवे पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।

उमर मोहम्मद- 12 नवंबर, 2017 डेयरी किसान उमर की गाय खरीदकर लौटते वक्त फराही गांव के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शव को गोविंदगढ़, अलवर के पास रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था।

तालिम हुसैन- 6 दिसंबर, 2017 राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि गो-तस्कर बदमाशों से अलवर के बाहरी इलाके में मुठभेड़ हुई। इस दौरान पुलिस ने तालिम हुसैन का एनकाउंटर कर दिया। लेकिन एक्टिविस्टों का दावा है कि कथित तस्करों की तरफ कोई फायरिंग नहीं की गई थी।

उमर खान- गौ तस्करों और पुलिस के बीच मुठभेड़। पल्ला जिला मेवात निवासी उमर खान को गिरफ्तार कर लिया गया।

इन घटनाओं ने मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण कर दिया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अलवर के मुस्लिम समुदाय ने धर्म के नाम पर वोट दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि अलवर लोकसभा सीट पर कुल 11 प्रत्याशी थे। जिनमें से दो मुस्लिम इब्राहीम खान और जमालुद्दीन भी शामिल हैं। ये दोनों निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे।

अगर मुस्लिम समुदाय ने धर्म के नाम वोट दिया होता तो इन्हें वोट मिलता लेकिन इब्राहीम खान को सिर्फ 769 और जमालुद्दीन को 1454 वोट मिले हैं। यानी मुस्लिमों ने बिना किसी भ्रम के अपना वोट एक साथ कांग्रेस के डॉ. करण सिंह यादव दिया। वैसे भी खुद बीजेपी नेता जसवंत सिंह ने चुनाव से पहले कहा था कि “हिन्दू हो तो वोट मुझे देना मुस्लिम हो तो कांग्रेस प्रत्याशी करण सिंह को वोट देना।”

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