पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में हुई हिंसा की आग अब धीरे-धीरे ठंडी पड़ रही है। हालात बिगड़ने से पहले ही वहां की सरकार ने उसे काबू में कर लिया। इलाक की स्थिति धीरे धीरे सामान्य की तरफ लौट रही है।

लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि फिर से ये आग नहीं फैलेगी। बंगाल की सरकार और प्रशासन को अब और ज्यादा सतर्क और सख्त होना होगा। क्योंकि अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इस आग को शांत नहीं होने देना चाहते।

कई लोग और कई ऐसे संगठन हैं जो बंगाल को सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंक कर उसका सियासी फायदा उठाना चाहते हैं। और इसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। चाहे अफवाह फैलाना हो या फर्जी खबर चलाना हो, या फिर फेसबुक और व्हाट्सअप ग्रुपों के जरिये फर्जी फोटो और वीडियो फैला कर लोगों की भावनाओं के भड़काना हो, ये लोग पीछे नहीं रहेंगे।

बंगाल में इस हफ्ते की शुरुआत में फेसबुक के एक पोस्ट से फैली हिंसा के बाद उससे जुड़ी कई फर्जी खबरें लगातार फैलाई जा रही हैं। दो धर्मों के बीच नफरत फैलाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही फर्जी खबरों और फोटो में बताया जा रहा है कि बंगाल में मुसलमानों ने हिंदुओं पर आतंक मचा रखा है। वहां हिंदू बहुत बुरी हालत में हैं। मुसलमान हिंदू लड़कियों और महिलाओं की इज्जत सरेराह लूट रहे हैं।

इसके लिए ये संघी-भाजपाई गैंग भोजपुरी फिल्मों की फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप्प ग्रुपों में इस तरह की फर्जी फोटो और खबरें भेजकर बंगाल सहित देश भर में हिंदुओं की भावनाएं भड़काई जा रही हैं। और यह काम पिछले लंबे समय से चल रहा है। बंगाल में रह-रह कर हो रहीं छिटपुट सांप्रदायिक घटनाओं के पीछे इसी संघी गैंग की साजिश है।

इस खेल में भाजपा में ऊंचे पदों पर बैठे लोग तक शामिल हैं। हरियाणा भाजपा की नेता विजेता मलिक उन्हीं में से एक हैं। इनका फेसबुक अकाउंट ऐसे तमाम फर्जी फोटो और खबरों से भरा पड़ा है। इनके फेसबुक पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बारे में भी आपत्तिजनक और निंदात्मक पोस्ट किए गए हैं। और ये सभी पोस्ट खुद विजेता मलिक ने किए हैं। विजेता हरियाणा में भाजपा की राज्यस्तरीय नेता हैं।  इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा के लोग किस हद तक देश का माहौल खराब करना चाहते हैं।

भाजपा वहां क्या खेल रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के फौरन बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने विवादित नेता कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में एक टीम वहां भेज दी। वहां पहुंचकर विजयवर्गीय ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को वहां के हालात के बारे में जो पत्र भेजा है उसे पढ़कर ऐसा लगता है कि जैसे पूरा बंगाल सांप्रदायिक हिंसा की आग में बुरी तरह जल रहा है। पत्र में विजयवर्गीय ने खुले तौर पर हजारों मुसलमानों द्वारा दंगा करने का आरोप लगाया है।

जबकि वास्तविक स्थिति इसके ठीक उलट है। वहां हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। संघ के लोगों की कोशिशों और तनाव के बावजूद वहां दोबारा कोई घटना नहीं हुई है। बंगाल से पहले संघ और भाजपा के लोगों ने यूपी और हरियाणा में भी यही खेल खेला था। भाजपा का पूरा गेम प्लान बंगाल को सांप्रदायिक दंगों में जलाकर वहां की सत्ता पर काबिज होना है। इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं।

बात सिर्फ आरएसएस या भाजपा की होती तो ज्यादा चिंता की बात नहीं थी। लेकिन इस खेल में मीडिया के लोग भी भाजपा का खुलकर साथ दे रहे हैं। कई वेबसाइटों पर इस तरह की फ्रजी खबरे चलाई जा रही हैं। सुदर्शन न्यूज तो चार कदम आगे ही निकल गया। अगर सही दिमाग का कोई आदमी इसकी साइट पर खबरें पढ़ ले तो वह पागल होकर हिंसा पर उतारू हो जाएगा।

पूरी वेबसाइट मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलानी वाली फर्जी खबरों से भरी पड़ी है। और तो और खुद को निष्पक्ष पत्रकार बनाने वाले मेनस्ट्रपीम मीडिया के भी कई बड़े नाम इस नफरत को बढ़ाने में लगे हैं। आज तक चैनल की बेबाक कही जाने वाली एंकर श्वेता सिंह इस खेल में ट्विटर पर लगी हुई हैं।

श्वेता तो एक कदम आगे जाकर उन बुद्धिजीवियों पर तंज कर रही हैं जो भीड़ द्वारा मुसलमानों की हत्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं। नफरत के इस खेल में श्वेता अकेली नहीं हैं और भी कई नाम हैं। धीरे-धीरे कई पत्रकारों की इंपोर्टेड पतलून के नीचे से खाकी चड्ड़ी बाहर आ रही है।

-आसिफ सुलेमान खान

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