केंद्र की मोदी सरकार अपने कामकाज को लेकर चारों खाने चित है। लगभग साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी सरकार का कोई ठोस काम नज़र नहीं आ रहा। बल्कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद लाखों लोग बेरोज़गार हो गए और उनके धंधे चौपट हो गए। नोटबंदी और जीएसटी के फ्लॉप होने की बात खुद वरिष्ट बीजेपी नेता और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा और आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने स्वीकार की है।

ऐसे में मेरठ के सरधना से बीजेपी विधायक संगीत सोम के द्वारा ये विवादास्पद बयान दिया जाना कि “ताजमहल भारतीय संस्कृति पर कलंक है और भारतीय जनता पार्टी अबतक पढाए जा रहे गलत इतिहास को बदल कर रहेगी”, महज राष्ट्रीय मुद्दों से देश की जनता का ध्यान भटकना है ताकि कोई सरकार के कामकाज की बात ना करे। सभी को पता है कि ताजमहल विश्व धरोहर है साथ ही दुनिया के सात अजूबों में से एक है और इससे उत्तर प्रदेश सरकार को पर्यटकों से भरी मुनाफा होता है।

संगीत सोम के ताजमहल के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने कहा कि “वो ताज पर ले जाएंगे, तुम उनके कामकाज पर अड़े रहना”। देखा जाए तो एक राजनेता को ताजमहल जैसी धरोहर को जस-का-तस छोड़कर अपने क्षेत्र के लोगों की भलाई और विकास के बारे में सोचना चाहिए। लेकिन नेता अपनी सरकार की कमियां छिपाने के लिए विवादास्पद बयानों का सहारा लेते हैं।

गौरतलब है कि संगीत सोम पर 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे भड़काने का आरोप लगा था। उनकी एक वीडियो भी वायरल हुई थी जिसमें वो लोगों को भड़काते हुए दिखाई दे रहे थे। मुजफ्फरनगर दंगों में 60 लोगों की मौत हो गई थी वहीं हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा था।

 

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