आज ही के दिन 25 साल पहले 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के हिस्से को ढाह दिया गया था। बीजेपी और उसके नेतागण इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे। बीजेपी ने कई चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़े और जीते भी। बीजेपी आज भी राम मंदीर के नाम पर राजनीतिक कर रही है।

अंतिम फैसला कोर्ट को करना इसके बावजूद बीजेपी राम मंदिर के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करती है। फिलहाल राम मंदिर का मामला कई वजहों से चर्चा में है। पहली वजह गुजरात चुनाव है। गुजरात में बीजेपी बार-बार राम मंदिर और बाबरी मंस्जिद का जिक्र कर रही है।

दूसरी बड़ी वजह ये है कि इसी महीने में आज ही के दिन बाबरी मस्जिद के एक हिस्से को तोड़ा गया था। तीसरा बड़ी वजह है कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल का सुन्नी वक्फ बोर्ड का वकील बनना है। यानी कपिल सिब्बल अयोध्या के विवादित जमीन की कानूनी लड़ाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वकील हैं।

अब बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आरोप लगा रहे हैं कि ”जहां एक तरफ कांग्रेस के होने वाले अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में मंदिर-मंदिर जाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनके नेता कपिल सिबल, राम मंदिर के निर्माण के निर्णय में देरी करवा कर श्री राम मंदिर के निर्माण में बाधा डाल रहें हैं।”

इसके जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने ट्वीट किया है कि ”ये राम भक्त नहीं नाथुराम भक्त है, चंन्दा लिया राम मंदिर के लिये और बनाया नाथूराम का मंदिर।”

प्रियंका गांधी नाम एक ट्विटर यूजर लिखा कि ”सरकार तुम्हारी, विधानसभा तुम्हारी, गवर्नर तुम्हारा, राष्टपति तुम्हारा, बहुमत तुम्हारा, महापौर भी तुम्हारा और राम मंदिर कपिल सिब्बल नही बनने दे रहा हैं। क्या कहने !!

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