पिछले साल अमरनाथ यात्रा पर हुए हमले में सलीम ने जब जान की परवाह किये बिना 52 यात्रियों को बचा लिया था तब पूरा देश गंगा जमुनी तहज़ीब दर्शाने वाले सलीम को सलाम कर रहा था। अब सलीम ने एक और ऐसा काम किया जिसे लेकर फिर से वो अपनी महानता से सुर्ख़ियों में है। उन्होंने पुरस्कार की राशि सेना को समर्पित कर दी है।

दरअसल जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग आतंकी हमले में 52 अमरनाथ तीर्थयात्रियों की जान बचाने वाले सलीम गफूर शेख ने आर्मी वेल्फेयर फंड में 11,000 रुपये दान दिए हैं। नागरिकों के लिए वीरता का दूसरा सबसे सर्वोच्च सम्मान “उत्तम जीवन रक्षा पदक” से नवाजे जा चुके सलीम ने फिर से देशभक्ति की मिसाल पेश की है।

सेना के लिए ये रकम भले ही कम हो मगर उन फासिस्ट ताकतों के लिए एक जोरदार तमाचा है जो मुस्लिमों को आये दिन पाकिस्तान जाने को कहते है। सलीम ने जितने पैसे सेना को दिए है वो उनकी महीने की कमाई से बहुत ज्यादा है।

हाल ही में सलीम को गणतंत्र दिवस के मौके पर 52 अमरनाथ यात्रियों की जान बचाने के लिए से सम्मानित किया गया था। यह वीरता के लिए नागरिकों को दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च सम्मान है।

सलीम अपनी बहादुरी के आगे सेना की समर्पण को समझते है और वो कहते है “मुझे भारतीय सेना पर गर्व है। उन्होंने हमें बचाया और हम सभी यात्रियों को सुरक्षित घर जाने का प्रबंध किया। भारतीय सेना की वजह से मैं और सभी 52 यात्री खुशी खुशी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं।”

सलीम आये दिन जवानों के मारे जाने पर दुःख ज़ाहिर करते हुए कहते है राशि को दान करने की वजह बताई।

उन्होंने कहा मैंने हाल ही में टीवी पर देखा कि हमारे चार जवान शहीद हो गए। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं जवानों के लिए कुछ करुंगा। मेरे अकाउंट में जो भी पैसा था उसे मैंने अपनी सेना के लिए दान दे दिया। हमारे जवानों के परिवारवाले ही देश को सच्चे सपूत देते हैं।

बता दें कि पिछले साल जुलाई में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में बातेंगू के नजदीक आतंकवादियों ने बस पर गोलीबारी शुरू कर दी थी। तब बस ड्राइवर सलीम ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से 52 तीर्थयात्रियों की जान बचाई थी।

उन्होंने बड़ी चालाकी के साथ आतंकियों को चकमा देकर बस को अंधेरे में दो किलोमीटर तक चलाकर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया था।

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