बिजली और पानी आम जनता के लिए हमेशा बड़े मुद्दें रहे हैं। बिजली की पहुँच और इसकी कीमत को लेकर अक्सर लोग आवाज़ उठाते और सड़कों पर उतरते दिखाई देते हैं। दिल्ली का 2013 विधानसभा चुनाव तो इससे पूरी तरह प्रभावित था| देश में फिर से ये सब नज़र आ सकता है क्योंकि केंद्र सरकार लगातार बिजली बनाने और उसके वितरण के लिए दी जा रही सब्सिडी घटा रही है।

इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल एनर्जी (आईआईओएस), ओवरसीज़ डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट (ओडीई) और  आईसीएफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 से 2016 के बीच केंद्र सरकार ने बिजली बनाने और वितरण में दी जा रही सब्सिडी को 82 हज़ार करोड़ घटा दिया है। इन तीन सालों में 38% सब्सिडी घटा दी गई है।

2013 में 2 लाख 17 हज़ार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही थी जबकि 2016 में ये घटकर एक लाख 35 हज़ार करोड़ ही रह गई है।

देश में जनता एक तरफ रोज़गार जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है और दूसरी तरफ सरकार बिजली जैसी मूलभूत ज़रूरत को लगातार महंगा कर रही है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक देश में अभी भी 30 करोड़ लोग बिजली की सुविधा से वंचित हैं।

बिजली के बढ़ते दामों का प्रभाव उद्योग पर भी पड़ता है। खासकर वो छोटे उद्योग या कारखानें जो छोटे शहरों में चलते हैं। इससे इनमें बनने वाली वस्तुएं महंगी होती हैं जो आखिर में फिर से आम जनता की ही जेब का भार बढ़ाती हैं।

अदनान अली

Loading...
loading...