अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने 09 अगस्त 2016 को आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले लिखी एक चिट्ठी में उन्होंने न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को ज़िम्मेदार ठहराया था।

उन्होंने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले में उनके हित में फैसला देने के लिए जज आदित्य मिश्रा ने 37 करोड़ रुपयें मांगे थे। आदित्य मिश्रा वर्तमान मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के भाई हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने इतिहास में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायपालिका में सब कुछ सही न चलने की बात कही है| जजों ने न्यापालिका में भ्रष्टाचार पनपने का आरोप लगाया है| उन्होंने ये भी बताया है कि इस सन्दर्भ में उन्होंने मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा को भी चिट्ठी लिखी लेकिन कोई जवाब नहीं आया| इसके बाद दीपक मिश्रा पर कई सवाल उठ रहे हैं|

कलिखो पुल को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा जाता था। उन्होंने अपने बचमन में संसाधनों के अभाव के कारण स्कूल में चौंकीदार का भी काम किया था। चौंकीदार से मुख्यमंत्री तक का सफ़र उन्होंने बहुत सी कठिनाईयों का सामना करते हुए तय किया था।

क्या था मामला

अरूणाचल कांग्रेस के बागी नेता थे। उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर नबाम टुकी की सरकार को गिराया था और खुद मुख्यमंत्री बने थे। कई हफ्तों तक अरुणाचल प्रदेश में सियासी उठापटक जारी थी। इसकी शुरुआत दिसंबर 2015 में तब हुई जब कांग्रेस के 47 विधायकों में से 21 ने बग़ावत कर दी और नाबाम टुकी की अल्पमत में आ गई थी। बागी विधायकों की अगुवाई पुल कर रहे थे। पुल फरवरी 2016 से जुलाई 2016 तक अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उन्हें पद से हटना पड़ा।

13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले दिया था जिसमे अरुणाचल प्रदेश के बर्खास्त मुख्यमंत्री नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को बहाल करने के आदेश दिए गए थे। न्यायालय ने राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसके तहत उन्होंने विधानसभा सत्र को जनवरी 2016 के बदले दिसंबर में ही बुलाने का फैसला किया था।

कलिखो पुल ने क्या लिखा

कलिखो पुल ने आत्महत्या से पहले लिखी चिट्ठी में अपनी पहले की ज़िंदगी, राजनीतिक जीवन और देश के उच्च संस्थानों में भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया था। नोट में, कालीखो ने न्यायिक भ्रष्टाचार के चार जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

उन्होंने लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का फैसला उनके पक्ष में देने के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के पुत्र राम अवतार शर्मा ने उनके सहयोगियों से संपर्क किया और 49 करोड़ रुपये की मांग की।

वर्तमान मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के भाई आदित्य मिश्रा ने 37 करोड़ रुपये की मांग की। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू और अल्तमस कबीर ने भी 28 करोड़ रुपये और 36 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी।

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