दिल्ली सरकार को लेकर केंद्र का जो रवैया है वह किसी से छुपा हुआ नहीं है। लेकिन अब तो दिल्ली में मंत्रियों की नियुक्ति के लिए भी केंद्र सरकार अड़ंगा लगा रही हैं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘ दो मंत्रियों की फाइल पर केंद्र 10 दिनों से बैठा है। दिल्ली सरकार में कई काम रुके हैं। आपकी हमसे दुश्मनी है, दिल्ली की जनता से बदला मत लीजिए।’

वहीँ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखते हैं ‘अब तो कपिल का धरना और मीडिया की नौटंकी बंद हो गई है। अब दो मंत्रियों की फाइल क्लियर कर दीजिए। ‘ क्योंकि दिल्ली सरकार का मंत्रालय छोटा है इसलिए दो मंत्रियों के कम होने से कामकाज में बाधा स्वाभाविक है।

‘दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं प्राप्त है’ इसी का हवाला देते हुए केंद्र सरकार दिल्ली के सभी कामों में दखलंदाजी करती रहती है । अभी तक समस्या ये थी कि दिल्ली का मुख्यमंत्री अपनी पसंद से अधिकारियों का चयन भी नहीं कर सकता । लेकिन केंद्र सरकार ज्यादती की ओर एक कदम और आगे बढ़ाते हुए इस हद तक आ गई है कि अब दिल्ली सरकार के मंत्रालय के चयन में भी बाधा पहुंचा रही है।

दिल्ली देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसका मुख्यमंत्री आधी से ज्यादा आबादी का वोट पाकर भी अधिकारियों के चयन पर अधिकार नहीं रखता।

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मसले पर अरविंद केजरीवाल लगातार केंद्र की भाजपा सरकार से टकराते रहे हैं लेकिन केंद्र के अड़ियल रवैये के सामने बेबस है। दिलचस्प यह है कि दिल्ली चुनाव के पहले नरेंद्र मोदी भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात करते थे।

 

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