मोदी सरकार को लगभग 4 साल हो चुके हैं। इस दौरान कई बार मोदी सरकार आम तौर पर अपने वादे पूरे ना होने का ठीकरा पुरानी सरकार पर फोड़ते हुई दिखी है। हर बात को ये कह कर टाल दिया जाता है की पुरानी सरकार भी तो यही करती थी।

घोटाले यूपीए सरकार में भी हुए और घोटाले एनडीए सरकार में भी हो रहें है। देश के ताज़ा हालात मोदी सरकार के खिलाफ है। क्योंकि बैंक से 11,400 करोड़ रुपए लेकर नीरव मोदी देश से फरार हो चुका है और मोदी सरकार कुछ भी नही कर पाई है।

अगर दोनों सरकारों में तुलना की जाए तो कांग्रेस की सरकार में लगभग सभी घोटालेबाजों को सजा हुई। वहीं मोदी सरकार के सभी घोटालेबाज शान से विदेशों में आराम कर रहें हैं।

कांग्रेस सरकार में कथित देश के सबसे बड़ा 2 जी घोटाला करने वाले ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को जेल हुई थी। कॉमन वेल्थ गेम्स में घोटाले करने वाले सुरेश कलमाड़ी को 2011 में जेल हुई। सत्यम कंप्यूटर घोटाला में रामलिंगा राजू को 7800 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप में जेल की सजा हुई थी। सहारा के प्रमुख सुब्रत राय भी घोटाले के आरोप में जेल में हैं।

वहीं मोदी सरकार में घोटालेबाजों पर कोई शिकंजा नहीं कसा गया। सबसे पहले विजय माल्या बैंकों के 9000 करोड़ रुपये लेकर देश से फरार हो गया, उसके बाद हथियार डीलर संजय भंडारी अभी तक सरकार के पहुच से दूर है।

वहीं विनसम ग्रुप के मालिक जतिन मेहता, जिसपर 15 बैंकों का 6,800 करोड़ रुपय का कर्ज है, पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, और अब नीरव मोदी और मेहुल चौकसी बैंकों से लगभग 20,000 करोड़ का घोटाला कर विदेश में आराम कर रहे हैं। मगर मोदी सरकार कुछ नहीं कर पा रही है।

इस तुलना से ये पता चलता है कि घोटाले तो दोनों सरकारों में हुए हैं लेकिन घोटालों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने में मोदी सरकार यूपीए सरकार से पीछे है।

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