चुनाव आयोग ने राज्यसभा की कुछ सीटों के लिए आगामी चुनाव में नोटा (इनमें से कोई नहीं) के विकल्प को शामिल करने का फैसला किया है। चुनाव आयोग द्वारा अचानक लिए गए इस फैसले का कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया है। मंगलवार को उच्च सदन में कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने आयोग के इस फैसले के विरोध में हंगामा किया।

कांग्रेस ने आयोग के इस फैसले पर कई सवाल खड़े किए हैं। प्रश्नकाल में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि पार्टी को इसबारे में जानकारी नहीं दी गई और नोटिफिकेशन के समय भी इसका जिक्र नहीं किया गया था। इस मसले को खारिज करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह चुनाव आयोग का विशेष अधिकार है।

गुजरात से राज्यसभा की सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा में जोर आजमाइश चल रही है। राज्य से तीसरी सीट पर संख्या के आधार पर कांग्रेस का दावा बनता है। लेकिन चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने कांग्रेस में सेंधमारी कर उसके 6 विधायकों से इस्तीफा दिलवा दिया और उनमें से एक को अपना उम्मीदवार बना दिया।

इस सीट से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल पार्टी के उम्मीदवार हैं। भाजपा की सेंधमारी से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने बचे हुए लगभग 40 विधायकों को कर्नाटक भेज दिया है। कांग्रेस ने इस मामले को सदन में भी उठाया था और भाजपा पर पैसे और ताकत का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

आयोग के फैसले पर अहमद पटेल ने ट्वीट करते हुए लिखा, पहले तो राज्यसभा चुनाव की तारीख आगे बढ़ा दी गई और अब नोटिफिकेशन के बाद नोटा लाने की वजह क्या है? यह चुनाव आयोग को ही मालूम है।

कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि यह फैसला कानून की किताब में खरा नहीं बैठता। उन्होंने कहा कि इसकी टाइमिंग ठीक नहीं है

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