आज सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक नया इतिहास लिख दिया है। क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के कार्यरत जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन जज़ों में जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ़ शामिल हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने ने पूछा कि आखिर मामला क्या है, तो जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि उन्होंने अपनी बात एक खत में कह दी है। उस खत की कॉपी आपको मिल जाएगी।

मीडिया में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की वजह न्यायपालिका में बढ़ते भ्रष्टाचार को बताया जा रहा है। दरअसल नवंबर 2017 में जस्टिस चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बीच एक केस के अलॉकेशन को लेकर कुछ विवाद हुआ था। ये मामला न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

अब अगर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मामला है, तो कलकत्ता के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कर्णन को याद किया जाना था। जस्टिस कर्णन ने ही न्यायपालिका में बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी।

जस्टिस कर्णन के प्रकरण को याद दिलाते हुए वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि ‘जिस बात को कहने के लिए सुप्रीम कोर्ट के चार जज को इकट्ठा होना पड़ा, वही बात जस्टिस कर्णन ने अपने दम पर कह डाली थी। “न्यायपालिका में करप्शन है!” शुक्रिया जस्टिस कर्णन।’

वही वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश राय पूरे प्रकरण को विस्तार से याद दिलाते। उन्होंने लिखा कि ”इस पूरे हँगामे में हमें इस शख़्स को नहीं भूलना चाहिए जिसने दमदार आवाज़ में सर्वोच्च न्यायालय में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और इसके बदले छह माह की जेल की सज़ा काटी। इस शख़्स का नाम सीएस कर्णन है और जब सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें अवमानना का दोषी पाते हुए सज़ा सुनायी, तब वे कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे।

ऐसा मामला आज़ाद हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार हुआ था। जेल में रहते हुए न्यायाधीश कर्णन ने अवमानना के क़ानून की संवैधानिक वैधता को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसे ख़ारिज़ कर दिया गया था।

आज के प्रकरण के बाद यह और भी ज़रूरी है कि अवमानना और मानहानि के क़ानूनों पर ठीक से पुनर्विचार हो। इसके साथ ही यह भी मुद्दा प्रासंगिक हो उठा है कि शीर्ष न्यायपालिका में समाज के विभिन्न तबकों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाये।

न्यायाधीश कर्णन के मामले में मीडिया और लोकतांत्रिक समाज ने अपनी भूमिका का ठीक से निर्वाह नहीं किया था। इन्हें भी अपने गिरेबान में झाँकने की ज़रूरत है। चार जजों के उठाये मुद्दों को मीडिया तकनीकी बिंदुओं में फँसाने की कोशिश करेगा। इससे सावधान रहने की ज़रूरत है।”

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