‘स्वच्छ भारत अभियान’ मोदी सरकार के सबसे ज़्यादा मशहूर या प्रचारित कदमों में से एक है। आज कल ये अभियान विवादों में घिरा हुआ है। क्योंकि पिछले काफी समय से ये देखा गया है कि क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त करने की घोषणा की जल्दी में सरकार विवादित कदम उठा रही है।

जैसे छत्तीसगढ़ में खुले में शौच करने वालों को उठाकर पूरे शहर में घुमाकर बेईज़्ज़त करना। कुछ राज्यों में ऐसे लोगों की शौच करने के दौरान फोटो खीची जा रही हैं। कुछ जगहों पर पीटने की भी घटनाएँ सामने आई हैं। इस जल्दबाज़ी ने अब भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।

उत्तरप्रदेश में “स्वच्छ भारत अभियान” में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सहारनपुर के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा की जांच में पाया गया कि इस अभियान की खुले में शोच रोकने यानि ओ.डी.एफ परियोजना में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है।

विकास अधिकारियों की जांच में यह पता चला है कि मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर और अन्य ज़िलों के क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया लेकिन वहां शौचालय केवल पेपर पर ही बनाए हैं।

जैसे, ग्राम प्रधान ने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से गठबंधन कर राकौती गांव को ओ.डी.एफ. घोषित कर दिया था। उन्होंने दावा किया था कि 444 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। लेकिन आधिकारिक जांच में पता चला कि कुल 444 शौचालयों में से केवल 80 शौचालयों का ही निर्माण किया गया था।

किसी भी योजना का सिर्फ अपने नाम के लिए प्रचार ज़्यादा करना इन चीज़ों को बढ़ावा देता है। सिर्फ आकड़े दिखाकर वाह-वाही लूटने के लिए गलत तरीके अपनाना और जल्दबाज़ी करने से जनता भी लाभ से वंचित रहती है और सरकारी पैसे का भी नुकसान होता है।

Loading...
loading...