अगर आप मानते हैं कि आंबेडकरवाद का ताल्लुक जन्म से नहीं विचार से है, तो आपको जस्टिस कर्णन के बारे में ये तथ्य जानने चाहिए।

– कर्णन एक विशुद्ध कर्मकांडी आदमी हैं। उनके दिन की शुरूआत पूजा-पाठ से होती है और छुट्टियां मंदिरों की परिक्रमा करते हुए बीतती हैं। वे मंदिरों ब्राह‍मणों को दान देने के लिए भी जाने जाते हैं।

– वे धार्मिक आस्थाओं के प्रतीक के रूप में मस्तक पर तिलक छाप लगाते हैं तथा कोर्ट रूम में इसी छाप के साथ आते हैं।

– वे बुद्ध को विष्णु का अवतार मानते हैं और डॉ आंबेडकर को बुद्ध का।

– ज्योतिष विद्या में उनकी अगाध श्रद्धा है। वे कई तांत्रिकों और साधुओं के भी भक्त रहे हैं। अपने मिलने वालों को वे स्वयं भी अंक-ज्योतिष के पाठ पढाया करते हैं। ज्योतिष की इस शाखा पर उनका भयंकर विश्वास है। उनका असली नाम एस करूणानिधि था। लेकिन उन्होंने पाया कि अंक ज्योतिष के अनुसार उनका यह नाम ही बडा आदमी बनने में बाधक बन रहा है। इसलिए उन्होंने 1991 में अपना नाम बदल कर चिन्नास्वामी स्वामीनाथ कर्णन (सीएस कर्णन) कर लिया।

– यह अनायास नहीं है कि इंटेलीजेंस की सूचना पर कोलकता, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश की पुलिस उन्हें विभिन्न मंदिरों में ढूढ रही है। उनके गिरफ्तारी के लिए आंध्रप्रदेश के श्रीकालहस्ती मंदिर, बालाजी आदि मंदिरों में पुलिस जा चुकी है।

उनकी धार्मिक आस्थाओं को समझने के लिए कमेंट में दिए गए लिंक देखें।

http://timesofindia.indiatimes.com/city/puducherry/karnan-was-karunanidhi/articleshow/58601592.cms

http://www.tribuneindia.com/news/nation/justice-karnan-vacates-chennai-room-to-visit-srikalahasti-temple/404931.html

 

कंवल भारती

आज जस्टिस कर्णन पर मेरी पोस्ट पर सवर्ण मित्रों की कुछ ज्यादा LIKE मिल गयीं, तो छद्म अंबेडकरवादी आपे से बाहर हो गए. कुछ व्यंगात्मक लहजे में बधाई देने लगे, तो कुछ मुझे आरएसएस का दल्ला बताने लगे. एक हरामी का पिल्ला धर्मवीर की भाषा में मेरे डीएनए टेस्ट कराने की बात करने लगा, तो एक साले ने मुझे कौम का गद्दार कह दिया. कल जब शब्बीरपुर की घटना पर मैंने लिखा था, तो कुछ सवर्ण गंवारो ने भी ऐसे ही अपशब्द लिखे थे. मतलब पूर्वाग्रही और घोर जातिवादी हरामखोर सब जगह हैं, ये साले समाज को बदलने चले हैं, जो खुद नहीं बदले. खुद अम्बेडकरवाद की ABC नहीं जानते, और मुझे अम्बेडकरवाद सिखा रहे हैं. ऐसे ही हरामखोरों ने दलित राजनीति को रसातल में पहुंचा दिया है.
इन बंदरों को मैं बताना चाहता हूँ कि मुझे संकीर्णता और पूर्वाग्रह से मुक्त होकर सोचने की शिक्षा डा. आंबेडकर से ही मिली है. और यह भी कि जातिवाद के गारे से आप कुछ भी नहीं बना सकते. मैं फिर कहना चाहता हूँ कि जस्टिस कर्णन ने डा. अम्बेडकर और पूरे दलित समाज का अपमान किया है।

नोट- यह ख़बर प्रमोद रंजन व कंवल भारती की फेसबुक पोस्ट पर जस्टिस कर्णन के विरोध को लेकर बनाई गई है।

Loading...
loading...