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पैर छू जाने पर 21वीं सदी में आदमी की हत्या कर दी गई!

यूपी के इलाहाबाद में जिस तरह सरेआम LLB कर रहे दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या की गई, उससे सवाल उठता है कि उन जातिवादी हत्यारों को ऐसा करने का साहस कौन दे रहा है?

योगी-मोदी-भागवत से सवाल है कि – “कहीं वे आप तो नहीं? आपने ही तो कहीं इन हत्यारों का हौसला नहीं बढाया है?”

पार्ट-2

इलाहाबाद के दिलीप सरोज हत्याकांड के खिलाफ रोहित वेमुला और गुजरात के ऊना जैसे विशाल लोकतांत्रिक आंदोलन और बड़े जन उभार की जरूरत है। वरना वे हमारे युवाओं को मार डालेंगे। सबको मार डालेंगे। कोई नहीं बचेगा। सबका नंबर लगेगा।

राष्ट्रीय आंदोलन समय की मांग है। पूरे देश में विरोध होना चाहिए। हर शहर में, हर कस्बे में।

पार्ट-3

जो समाज अपने बच्चों और बच्चियों को, युवाओं को नहीं बचा सकता, बचाने की कोशिश नहीं करता, वह गुलाम रहने के लिए अभिशप्त है।

इलाहाबाद दिलीप सरोज हत्याकांड।

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