दिल्ली मेट्रो की किराए को लेकर खीचतान के बाद आज बढ़ा हुआ किराया लागू हो गया है। पांच महीनों में ये दूसरी बार है जब मेट्रो का किराया बढ़ा है। किराए को लेकर दिल्ली और केंद्र सरकार में भी ठनी लेकिन मोदी सरकार नहीं मानी और अंततः किराया बढ़ ही गया।

जब 25 दिसंबर, 2002 को जब दिल्ली मेट्रो की शुरुआत हुई थी, तो न्यूनतम किराया 4 रुपये था और अधिकतम 8 रुपये था।

कितना है नया किराया

– दो किलोमीटर तक के लिए 10 रुपये

– दो से पांच किलोमीटर तक के लिए 20 रुपये

– पांच से 12 किलोमीटर के लिए 30 रुपये

– 12 से 21 किलोमीटर के लिए 40 रुपये

– 21 से 32 किलोमीटर के लिए 50 रुपये

– 32 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा के लिए 60 रपये

किराया बढ़ने से यात्री हो रहे कम

छात्रों, माध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग पर इसका असर पड़ा है। गौरतलब है कि दिल्ली मेट्रो के आकड़ों के मुताबिक पिछली बार किराया बढ़ने के बाद दिल्ली मेट्रो में प्रतिदिन यात्रा करने वाले लोगों में करीब 1.5 लाख की कमी दर्ज की गई है।

दिल्ली सरकार ने जताया था विरोध

दिल्ली की आप सरकार ने इस किराया बढ़ोतरी को जनविरोधी बताया था। दिल्ली सरकार ने विधानसभा में किराया बढ़ोतरी के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था लेकिन DMRC बोर्ड ने रातोंरात बैठक कर प्रस्ताव पर रोक लगाई।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि यह निजी कैब ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने की साजिश है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, बोर्ड में 16 निदेशकों में से दिल्ली सरकार के पांच निदेशक हैं, जिन्होंने इसका विरोध किया। हालांकि केंद्र ने हठी रवैया दिखाया।

दिल्ली सरकार सालाना 1500 करोड़ देने को राज़ी

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर कहा था कि मेट्रो का किराया न बढ़ाया जाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने कहा कि अगर सीएम केजरीवाल मेट्रो के नुकसान की भरपाई सालाना 3 हज़ार करोड़ दे सकते हैं तो किराया नहीं बढ़ेगा।

दिल्ली सरकार ने आधा नुकसान 1500 करोड़ देने की पेशकश रखी और आधा केंद्र सरकार से देने का आग्रह किया| इसके आलावा भी सीएम केजरीवाल ने बढ़ोतरी रोकने के तीन प्रस्ताव रखे थे लेकिन केन्द्रीय मंत्री हरदीप पूरी ने उसे ख़ारिज कर दिया।

 

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