तेज बहादुर यादव को बनाइए गोरखपुर या फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी के खिलाफ सर्वदलीय उम्मीदवार! भ्रष्टाचार-विरोध और देशभक्ति को बनाइए मुद्दा।

1996: लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी थी। टिकट तय हो रहे थे। समाजवादी पार्टी की यूपी की लिस्ट जारी हुई। मुलायम सिंह यानी नेताजी ने इसकी घोषणा की।

लिस्ट में एक नाम पर सबकी निगाहें ठहर गईं। मिर्ज़ापुर से फूलन देवी। अतीत की बाग़ी। विश्व की श्रेष्ठ विद्रोहिणी की टाइम मैगजीन की लिस्ट में शामिल भारत की अकेली महिला फूलन देवी।

फूलन देवी ने 1981 में बेहमई कांड किया था। यह उनका सामाजिक और निजी प्रतिशोध था। इस घटना की वजह से वीपी सिंह को यूपी के सीएम पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था।

फूलन देवी ने 1983 में मध्य प्रदेश के सीएम अर्जुन सिंह की उपस्थिति में 20,000 लोगों की भीड़ के सामने आत्मसमर्पण किया और फिर 11 साल जेल की सजा काटी। पेरोल पर 1994 में रिहाई के बाद एकलव्य सेना का गठन किया।

1996 में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह को लगभग 40,000 वोट से हराकर फूलन देवी लोकसभा में दाख़िल हुईं। मुलायम सिंह देश के रक्षा मंत्री बने। इसके बाद वे 1998 में हारीं और 1999 में फिर लोकसभा में पहुँचीं। 2001 में दिल्ली में सरकारी कोठी में अपराधियों ने उनकी हत्या कर दी।

2017: तेज बहादुर यादव ने सीमा की रक्षा के लिए अपनी पूरी जवानी लगा दी है। उन्होंने करप्शन के खिलाफ आवाज़ उठाई है। वे देश के युवाओं की आवाज़ बन चुके हैं। उनकी देशभक्ति असंदिग्ध है।

अगर उन्हें उपचुनाव में सर्वदलीय उम्मीदवार बनाया जाता है, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को ताक़त मिलेगी। आदर्श स्थिति में बीजेपी को उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए।

वे संसद में जनरल वीके सिंह की तुलना में बेहतर प्रतिनिधि साबित होंगे। जनरल सिंह का मामला निजी लाभ के लिए था। जबकि तेज बहादुर सिंह सुरक्षा बलों को स्वस्थ देखना चाहते हैं। जिसके लिए अच्छा राशन जरूरी है।

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