इस साल हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विधानसभा चुनाव इसलिए भी याद किये जाएँगे कि इनकी मतदान तारीख को लेकर विवाद हुआ था। चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव हिमाचल प्रदेश के मुकाबले देरी से कराए|

इसपर विपक्ष ने आरोप लगाया था कि गुजरात में चुनाव कार्यक्रम देरी के कारण गुजरात की राज्य सरकार और केंद्र की सरकार को चुनाव से तुरंत पहले वहां लोकलुभावन नीतियां और घोषणाएं करने का मौका मिल गया है।

जबकि अगर वहां चुनावी तारीखों का ऐलान हो जाता तो आचार संहिता लागू हो जाती और सरकार को ऐसा करने का मौका नहीं मिलता। बता दें, कि ही में गुजरात में राज्य सरकार की तरफ बहुत सी योजनाओं और परियोजनाओं की घोषणा हुई।

इसपर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि गुजरात में मतदान इसलिए टाला गया क्योंकि गुजरात में जुलाई में बाढ़ आई थी और आचार संहिता के कारण राज्य सरकार राहत कार्य नहीं कर पाती।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ए के जोती ने 12 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गुजरात सरकार ने हमसे ये निवेदन किया था कि राज्य में जुलाई में बाढ़ आई है और राहत कार्य सितम्बर में शुरू हुआ इसलिए आचार संहिता ऐसे समय में लागू हो जिससे राहत कार्य में कोई दिक्कत न हो।

लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक ऐसी ही स्तिथि जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के समय आई थी लेकिन तब तो चुनाव को नहीं टाला गया था।

जम्मू कश्मीर में क्यों नहीं टाले चुनाव?

जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव नवम्बर 2014 से तीन महीने पहले बाढ़ आई थी। बाढ़ इतनी भयानक थी कि उसमें 300 लोगों की मौत हो गई और हज़ारों प्रभावित हुए। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक जम्मू कश्मीर में राहत कार्य नवम्बर में शुरू किया गया लेकिन फिर भी चुनाव आयोग ने चुनाव नहीं टाला और 25 नवम्बर 2014 को मतदान हुआ।

मतदान में लगभग 65% लोगों ने हिस्सा भी लिया जो अभी तक का जम्मू कश्मीर का सबसे ज़्यादा आकड़ा है। नेशनल कांफ्रेंस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मतदान टालने के लिए भी कहा था लेकिन फिर भी चुनाव आयोग ने चुनाव न टालते हुए मतदान कराया।

विशेष प्रावधानों के साथ हो सकते हैं चुनाव

5 नवंबर 2014 को, चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को यह जानकारी दी कि उनके पास आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आचार संहिता लागू के लिए अलग प्रावधान हैं। जिससे राहत कार्य प्रभावित नहीं होगा और राज्य सरकार पीड़ितों की हर संभव मदद कर सकेगी।।

इसके बाद जम्मू कश्मीर में चुनाव भी हुए और राहत कार्य भी चलता रहा। केवल कुछ कार्यों के लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी पड़ी। चुनाव के बाद सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस हारी और पीडीपी ने सत्ता संभाली।

सवाल ये है कि अगर जम्मू कश्मीर में इतनी भयानक बाढ़ के बाद भी कुछ विशेष प्रावधानों के साथ आचार संहिता लागू कर चुनाव कराए जा सकते थे तो गुजरात में ऐसा क्यों नहीं किया गया?

 

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