सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार की रिपोर्ट कार्ड पर नज़र डाले तो नौकरियों के मामले में इस सरकार का काफी खराब प्रदर्शन है और कोई संकेत भी नहीं मिल रहा है कि भविष्य में चीजें बेहतर होंगी। विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में धीमी वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हमेशा से चुनौती रही है, क्योंकि पिछले 25 सालों में इस क्षेत्र में विकास दर स्थिर ही बनी हुई है। जबकि इन 25 सालों में ताईवान और चीन की विकास दर दोगुनी हो चुकी है।

अगर कोई रोजगार विनिमय केंद्रों के आंकड़ें देखेगा तो वो जान पाएगा कि देशभर में गुजरात (30 प्रतिशत की सफलता दर) को छोड़कर ये विनिमय केंद्र 0.57 प्रतिशत की औसत से ही रोजगार उपलब्ध करा पा रहे हैं।

2015 में 500 व्यक्तियों में केवल 3 को ही रोजगार मिला है। हालांकि गुजरात की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है लेकिन और राज्यों से बेहतर है। ऐसे में नरेंद्र मोदी का 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा भी जुमला ही साबित हो रहा है।

नीति आयोग द्वारा 12वीं पंचवर्षीय योजना के मूल्यांकन के अनुसार,

भारत में पूंजीगत और उच्च-कुशल क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने से ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है, जो कम कुशल श्रमिकों को रोजगार नहीं देते हैं; जिससे अधिकांश कामगार कृषि और असंगठित क्षेत्रों में ही केंद्रित रहते हैं। देश में साल दर साल नौकरी चाहने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। 2012 में रोजगार विनिमय में पंजीकृत कामगारों की संख्या 4.47 करोड़, 2014 में 4.82 करोड़ और 2015 में 5.98 करोड़ थी।

केंद्र सरकार ने इन आंकड़ो को देखते हुए अजीब ही जवाब दिया है। केंद्र का कहना है,

भारत की चुनौती विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से वृद्धि नहीं है बल्कि श्रमिक क्षेत्रों जैसे कि कपड़ों, चमड़े के विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने के लिए है। इन क्षेत्रों में वृद्धि से सीमित कौशल वाले श्रमिकों के लिए अच्छी नौकरी बनाने में मदद मिलेगी, जिससे कृषि और अनौपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों औपचारिक क्षेत्र में आ सकेंगे।

नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, देश में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 997 रोजगार विनिमय केंद्र काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश 99 रोजगार विनिमय केंद्रों के साथ राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है, इसके बाद केरल (89), पश्चिम बंगाल (77), हरियाणा (59), असम (52), मध्य प्रदेश (49), गुजरात (48) पंजाब (47), छत्तीसगढ़ (47) और महाराष्ट्र (47) है।

गोवा और केंद्र शासित अंडमान निकोबार, दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में प्रत्येक के पास एक-एक रोजगार विनिमय केंद्र है। सिक्किम एकमात्र ऐसा राज्य है जहां कोई रोजगार विनिमय केंद्र नहीं है।

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