बढ़ती पूंजीवादी नीतियों की वजह से भारत में असामनता यानि अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। हाल ही के सालों में जिस तेज़ी से अमीरों की संपत्ति बढ़ी है और गरीबों की घटी है वो मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है।

गैर सरकारी संगठन ऑक्सफेम ने एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में असमानता बीते तीन दशकों से बढ़ रही है। हालत यह है कि देश के कुल जीडीपी का 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीय अरबपतियों के खाते में है।

रिपोर्ट में इन हालात के लिए सरकारों की असंतुलित नीतियों को ज़िम्मेदार बताया है। गौरतलब है कि सरकार गरीबों के लिए काम करने के दावे तो करती है लेकिन इसके बावजूद अमीरों की संपत्ति बढ़ रही है। गरीब के लिए देश में व्यवसाय से लेकर रोज़गार तक की तंगी है।

इसमें कहा गया है कि भारत में अमीरों ने देश में सृजित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा  क्रोनिकैपिटलिज्म (ऐसी व्यवस्था जिसमें सरकार या सत्ता के साथ उद्योगपतियों के रिश्ते बहुत ज़्यादा अच्छे हो और उद्योगपतियों को गैर कानूनी तरीके से लाभ पहुँचाया जाए) में हासिल किया है। वहीं नीचे के तबके का आय में हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है।

ऑक्सफेम इंडिया की सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा,‘ये असमानताएं 1991 के बहुप्रचारित उदारीकरण के दौरान अपनाए गए सुधार पैकेजों तथा उसके बाद अपनाई गई नीतियों का परिणाम हैं।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि ताज़ा अनुमानों के अनुसार भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के 15 प्रतिशत के बराबर है। यह केवल पांच साल पहले ही जीडीपी के 10 प्रतिशत के बराबर थी।

मतलब पिछले पांच सालों में अमीरों की संपत्ति बहुत तेज़ी से बढ़ी है। इसके अनुसार 2017 में भारत में 101 अरबपति थे जिनकी हैसियत 65 अरब रुपए या उससे अधिक है।

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