महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में राज्य में सामने आए झुग्गी-पुनर्विकास परियोजना घोटाले में खुद को बचाने के लिए प्यादे बिठा दिए हैं|

विपक्ष का आरोप है कि देवेन्द्र फडणवीस घोटाले की जांच के लिए लोकायुक्त को नियुक्त किया है लेकिन लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री आते ही नहीं|

आपको बता दे की हाल ही में मुंबई में एक झुग्गी-पुनर्विकास परियोजना घोटाले सामने आया है| इस घोटाले में आवास मंत्री प्रकाश मेहता और राज्य के मुख्मंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम भी है| घोटाला अनुमानित 2000 करोड़ का बताया जा रहा हैं| अब मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त से जाँच कराने की घोषणा की है|

मेहता द्वारा दक्षिण मुंबई में एमपी मिल्स कंपाउंड में एसआरए (स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) परियोजना में अतिरिक्त निर्माण अधिकार परियोजना प्रभावित लोगों को अनाधिकृत हस्तांतरित करने को कथित रूप से अनुमति देने के बाद से वह आलोचनाओं के शिकार हो रहे थे| मूल रूप से यह झुग्गी में रहने वालों के लिए मंजूर हुआ था|

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि “मुख्यमंत्री ने एक चालाकी भरा खेल खेला है”। एक ओर उन्होंने आवास मंत्री के खिलाफ जांच के नतीजों से खुद को बचाया है, और दूसरी ओर लोगों को यह दिखाने का भी एक प्रयास किया है कि वह सभी आरोपों की जांच कराते हैं।

मलिक ने कहा कि महाराष्ट्र लोकायुक्त अधिनियम के अनुसार, मुख्यमंत्री लोकायुक्त के दायरे में नहीं आते हैं।

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