आम नागरिकों पर तो जीएसटी की मार पड़ ही रही थी लेकिन अब फिल्में भी जीएसटी की चपेट में आ गई हैं। जहाँ जीएसटी के साथ-साथ स्टेट टैक्स भी साउथ फिल्म इंडस्ट्री पर लागू किया जा रहा है वहीँ सुपरस्टार रजनीकांत ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार को जीएसटी के अलावा 30 प्रतिशत स्थानीय निकाय कर को हटाने की अपील की है।

तमिल सरकार के इस कर के विरोध में 1000 से भी ज्यादा सिनमाघर बंद किये गए है।

रजनीकांत ने ट्वीट कर कहा “तमिल फिल्म उद्योग में लाखों लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए, मैं तमिलनाडु सरकार से गंभीरता से हमारी याचिका पर विचार करने के लिए अनुरोध करता हूं।”

इस मुद्दे को अभिनेता कमल हासन ने भी उठाया है उन्होंने कहा  “केरल जैसे पड़ोसी राज्यों ने जीएसटी के ऊपर सिनेमा पर कोई कर नही लगाया है। कर्नाटक सरकार भी फिल्म उद्योग की भलाई के लिए कार्य का रही है। और  तेलंगाना और आंध्र प्रदेश भी अच्छा कर रहे हैं। केवल तमिलनाडु की सरकार है, जिसने मनोरंजन कर 30 प्रतिशत कर दिया है।”

दरअसल तमिलनाडु सरकार ने तमिल फिल्मों पर जीएसटी अलावा स्टेट टैक्स भी लागू कर दिया है। जिससे दक्षिण फिल्म उद्योगों को रोज़ के 20 करोड़ का घाटा हो रहा है।

वहीँ करों में वृद्धि के विरोध में राज्य में 1,000 से अधिक सिनेमाघरों को बंद कर दिया गया है। मालिको का कहना हैं कि 28 प्रतिशत के नए राष्ट्रीय कर जीएसटी के ऊपर टिकटों पर 30 फीसदी का राज्य कर सिनेमा को बंद कर देगा और अवैध तरीके से फिल्मों की डाउनलोडिंग को बढ़ावा देगा। वे कहते हैं ‘उनकी हड़ताल अनिश्चित है और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे फिल्मों को स्क्रीन नहीं करेंगे।‘

तमिल फिल्म उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि करों से लगभग 10 लाख लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि तमिलनाडु थियेटर ओनर्स एसोसिएशन के प्रमुख अबामी रामनाथन ने कहा “हम जीएसटी के खिलाफ नहीं बल्कि हम मनोरंजन टैक्स के खिलाफ हैं जो कि 30 प्रतिशत हैं।

वहीँ दक्षिण भारतीय फिल्म चैंबर के अध्यक्ष एल सुरेश ने कहा, “राज्य सरकार द्वारा लगाया गया कर अनैतिक है। यह डबल टैक्सेशन के बराबर है हम चाहते हैं कि राज्य कर पूरी तरह से हटा दिया जाए।”

स्थानीय टैक्स के अलावा, 100 रुपये से नीचे की टिकटों के लिए 18 फीसदी जीएसटी तय की गई है और 100 रुपये के ऊपर के लिए 28 फीसदी तय की गई है।

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