देश में अघोषित इमरजेंसी का दौर आ चुका है। सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद आप सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक पर सुरक्षित नहीं हैं। पहले तो आपको गाली गलौच का शिकार बनाया जाता था लेकिन अब सीधा गिरफ्तार किया जा रहा है। एक लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को गिरफ्तार करना कितना उचित है?

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और रैलियां भीड़ और उनके नाम के नारों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन अब इस भीड़ और सिर्फ समर्थन में लग रहे नारों पर सवाल उठने लगे हैं।

अपने गुजरात दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दौरे के दूसरे दिन भरूच पहुंचे थे। खबर है कि भरुछ ज़िले के मछुवारों ने पीएम मोदी द्वारा भाडभूत गाँव में बैराज बाँध के उद्घाटन का नर्मदा नदी में उतरकर काले झंडे दिखाकर विरोध किया। लगभग 250 मछुआरों ने 100 नावों पर काले झंडे बांधकर पीएम मोदी का विरोध किया। लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

क्यों किया विरोध

पूरी परियोजना भाडभूत गांव में नर्मदा नदी को बाधित करेगी जो की हिलसा और अन्य मछली प्रजातियों की प्रजनन भूमि से 40 किलोमीटर दूर है । यह बाँध मुहाना के प्रजनन मैदान को तबाह कर देगा। प्रस्तावित परियोजना से होने वाले विस्थापन से मछुवारों की आजीविका और जीवन ख़तम हो सकता है। नर्मदा बचाओ आन्दोलन भरुछ के मछुवारो के नर्मदा नदी को बचाने के संघर्ष में उनके साथ है।

डरी हुई है भाजपा

भाजपा इस समय बुरी तरह डरी हुई है। जिस प्रकार अचानक पूरे देश में महंगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक का विरोध जनता कर रही है उसे भाजपा अनदेखा करना चाहती है। इस सब से पीएम मोदी की लोकप्रियता में भी गिरावट आई है। लेकिन भाजपा ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि सब कुछ सामान्य है और भाजपा को अभी तक उतना ही समर्थन हासिल है।

विरोध के डर के चलते शनिवार को हरियाणा में भी भाजपा सरकार ने सीएम खट्टर की जनसभा में पहुंची महिलओं के काले दुपट्टे उतर वालिये। दो महीने बाद गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं। राज्य में भाजपा विरोधी माहौल नज़र आ रहा है। इसलिए राज्य में अपनी झूटी लोकप्रियता को दिखाने के लिए भाजपा लोगों को गिरफ्तार कर रही है।

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