पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने देश में मुसलमानों की हालिया स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुसलमान पहचान आधारित भेदभाव और छिटपुट हिंसा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से समस्या का निदान करने की अपील की।

अंसारी फ़राह नक़वी की किताब ‘वर्किंग विद मुस्लिम्स बियॉन्ड बुर्का एंड ट्रिपल तलाक’ का विमोचन करने के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि मुसलमान अभाव और पिछड़ेपन की वजह से कई अन्य की तरह व्यथित हैं। इसके अलावा मुसलमान ख़ासतौर पर पहचान आधारित भेदभाव और छिटपुट हिंसा का सामना करते हैं।

2006 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा कि मुसलमान विकास संबंधी कई तरह के अभाव के शिकार हैं। मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा तबका गरीब और शक्तिहीन है। सुविधाओं तथा मौकों तक उसकी पहुंच नहीं है।

अंसारी ने सकारात्मक तरीके से मुसलमानों के सशक्तिकरण की पैरवी भी की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की समस्याओं का राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर हल निकाल कर उन्हें विकास के मौके प्रदान करने चाहिए।

पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अन्य नागरिकों की तरह लाभ लेने में उन्हें सक्षम बनाएगा और उन्हें एक ऐसे मुकाम पर ले जाएगा जहां सरकार का ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा सच हो जाएगा।

ऐसा पहली बार नहीं है जब अंसारी ने मुसलमानों की समस्याओं पर चिंता जताई है।  इससे पहले भी वह भारतीय मुसलमानों में असुरक्षा के माहौल पर अपनी बीत रख चुके हैं।

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