बाबा रामदेव आजकल अपनी कंपनी पतंजलि को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। पिछले कुछ सालों में ही उनकी कंपनी ने बहुत ज़्यादा तरक्की की है। साथ ही वो इस बात को लेकर भी ख़बरों का हिस्सा बनते रहते हैं कि वो हमेशा स्वदेशी की बात करते हैं।

बाबा रामदेव के मुताबिक उनका पतंजलि को शुरू करने का मकसद भी यही है कि देश में स्वदेशी को बढ़ावा मिले और विदेशी कंपनियों की जगह देश की कम्पनियाँ ही तरक्की करें ताकि देश का पैसा देश में रहे और देश के ही काम आए। लेकिन कंपनी के हालिया कदम से वो अपने ही उसूल के खिलाफ जाते नज़र आ रहे हैं।

ख़बरों के अनुसार, फ़्रांस की अन्तर्राष्ट्रीय कंपनी एलवीएमएच पतंजलि में 5000 करोड़ का निवेश करने जा रही है। कंपनी का सालाना राजस्व ही 10 हज़ार करोड़ है। अगर एलवीएमएच 5 हज़ार करोड़ का निवेश करती है तो वे कंपनी राजस्व के बड़े हिस्से की हक़दार होगी।

इस नज़रिए से देखा जाए तो देश का पैसा विदेश जाएगा। बाबा रामदेव हमेशा कहते हैं कि पतंजलि को शुरू करने के पीछे उनका मकसद किसी तरह का लाभ कमाना नहीं है। जब रामदेव किसी तरह का लाभ नहीं चाहते हैं तो वो हज़ारों करोड़ का निवेश वोदेशी कंपनी से क्यों स्वीकार रहे हैं।

क्या उन्हें कंपनी को बढ़ाने की जल्दी है? अगर जल्दी है भी तो ये जल्दी किस बात की है? क्या आने वाले समय में देश में कोई बदलाव होने वाला है जिसको रामदेव भी समझ रहे हैं?

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