पवित्र गंगा नदी में रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं। कहने को तो वह अपने ‘पाप’ धुलते हैं लेकिन एक आरटीआई के जवाब में अब पवित्र गंगा का पानी नहाने लायक भी नहीं रह गया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(CPCB) ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी नहाने के लिए भी नहीं रह गया है। इस खुलासे के बाद तीन साल से केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज पर भी सवाल उठने लाजिमी हैं।

नमामि गंगे जैसी योजनाओं में करोड़ो फूंकने के बाद हरिद्धार जहां से गंगा निकलती है। वहां गंगा को साफ नहीं किया जा सका है। उत्तराखंड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार जिले तक 11 जगह से पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए गए थे। ये 11 लोकेशन्स 294 किलोमीटर के इलाके में फैली हैं।

बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज ने बताया, इतने लंबे दायरे में गंगा के पानी की गुणवत्ता जांच के 4 प्रमुख सूचक रहे, जिनमें तापमान, पानी में घुली ऑक्सीजन(DO), बायलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड(BOD) और कॉलिफॉर्म(बैक्टीरिया) शामिल हैं। हरिद्वार के पास के इलाकों के गंगा के पानी में BOD, कॉलिफॉर्म और अन्य जहरीले तत्व पाए गए।

आपको बता दें कि, 16 मई को मोदी सरकार के तीन साल पूरे हुए हैं। तीन साल बेमिसाल कहने वाली सरकार के लिए गंगा की पवित्रता में जहर घुल जाना एक नाकामी है।

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