भारतीय उद्योगपति गौतम अडाणी का ऑस्ट्रेलिया में इस समय जमकर विरोध हो रहा है। वहन के लोगों का कहना है कि अडानी की कोयला परियोजना से वहां पर्यावरण को बड़ी हानि पहुंचेगी। इसी तरह के बहुत से आरोप अडानी पर भारत में भी लगे है इसके बावजूद वो सरकार से लेकर मीडिया तक के हीरो बने हुए हैं।

क्यों हो रहा ऑस्ट्रेलिया में विरोध

भारतीय कारोबारी अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया भर में प्रदर्शन हुए। पर्यावरण के लिए काम कर रहे संगठनों का आरोप है कि क्वींसलैंड स्टेट में बनने वाली यह खदान ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण बनेगी। साथ ही ग्रेट बैरियर रीफ को भी नुकसान पहुंचाएगी। ‘स्टॉप अडानी’ नाम के इस मूवमेंट के तत्वाधान में कुल 45 विरोध-प्रदर्शन हुए।

ऐक्टिविस्ट ग्रुप 350 की ऑर्गेनाइजरक ब्लेयर ने कहा कि सिडनी के बोंडी बीच पर 1000 से अधिक लोगों ने ‘स्टॉप अडानी’ का संकेत बनाया। एक स्थानीय मीडिया के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के आधे से अधिक लोग इस खदान परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

भारत में हो रहा विकास

हौरुण इंडिया रिच लिस्ट 2017 के अनुसार गौतम अडानी की संपत्ति भी पिछले साल के मुकाबले 66% बढ़कर 70 हज़ार 600 करोड़ हो गई है।

पीएम मोदी और भाजपा से से नज़दीकियाँ

इन नजदीकियों की शुरुआत तब हुई थी जब 2002 के दंगों के बाद “द अपैक्स चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स”,”द कॉनफ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII)” ने तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की और उसके बाद अडानी और उनके कुछ साथी व्यावसायिकों ने आलोचना के विरोध में CII को छोड़ने की धमकी दी।

गौरतलब है की जब सितम्बर 2013 को भाजपा ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया तो उसके बाद अडानी एंटरप्राइज़ के मार्किट शेयरों के दामों में 5 रुपए से 786 रुपए तक की बढ़त देखी गई। अडानी के ट्विटर अकाउंट को भी देखा जाए तो वो सिर्फ भाजपा और भाजपा समर्थकों को ही फॉलो करते हैं।

मोदी सरकार पर आरोप

मोदी सरकार पर ये भी आरोप है की उन्होंने अडानी को ऑस्ट्रेलिया कोयला खान के लिए बड़ा क़र्ज़ दिया। जब इस बात की जानकारी मांगी गई की ये क़र्ज़ किस आधार पर दिया गया है तो जानकारी देने से मन कर दिया गया। सीआईसी से रमेश रणछोड़दास जोशी ने ये जानकारी मांगी थी लेकिन केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने जानकारी देने से इंकार कर दिया है।

फोर्ब्स के पत्रिका के बड़े पैमाने पर शोध किए गए लेख के रूप में कहा 16,000 एकड़ जमीन अडानी समूह को 1- 32 प्रति वर्ग मीटर में आवंटित की गई जबकि औसत बाजार मूल्य 1100 रुपये प्रति वर्ग मीटर था, और कुछ ने 6000 प्रति वर्ग मीटर का भुगतान भी किया। यह अडानी को 6,546 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ है।

अर्थशास्त्री और पत्रकार प्रन्जॉय गुहा ठाकुरता ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि, सरकार ने स्पेशल इकनोमिक जोन (SEZ) के अधिनियम में चुपचाप बदलाव करके अडानी ग्रुप को 500 करोड़ रूपए का फायदा पहुँचाया है।

अडानी पर आरोप

सोने और आभूषण के व्यापर के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) का आरोप है कि गौतम अडानी की अध्यक्षता वाली एक कंपनी ने सोने और आभूषण के व्यापर के दौरान एक हज़ार करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग (काले पैसे को सफ़ेद करना) की है। इसके बाद भी  मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर नहीं की।

टैक्स बचाकर काला धन जमा कर रहे अडानी

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अडानी समूह की कुल 26 सहायक कंपनियों में से 13 को कथित तौर पर केमन द्वीप समूह में दर्ज किया गया है ये द्वीप पृथ्वी पर सबसे ज्यादातर कर हेवन (टैक्स न देने वाले) में से एक है।

केमन द्वीप में खुद को दर्ज करने का कारण संपत्ति करों और राजस्व को छुपाने के अलावा कुछ भी नहीं है। लेकिन कालेधन को ख़त्म करने की बात करने वाली मोदी सरकार ने इस बात के लिए अडानी समूह से पूछताछ नहीं की।

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