मेनस्ट्रीम मीडिया होने का दम भरने वाले चैनल जैसे- आज तक, जी न्यूज, न्जूज 18 के लिए आज शाम का क्या मुद्दा है? टीवी चालू कीजिए और चेक कीजिए। क्या देखने को मिल रहा है?

और सिर्फ आज का नहीं बल्कि इन चैनलौं की पूरानी खबरों को भी याद कीजिए। इन चैनलों के लिए मुख्य मुद्दा क्या है? क्या इन चैनलों ने कभी रोजगार का मुद्दा उठाया? शिक्षा के मुद्दे को उठाया? किसानों के मुद्दे को उठाया? महंगाई के मुद्दे को उठाया? भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया?

नहीं उठाया। उठाया सिर्फ राष्ट्रवाद का मुद्दा, हिंदु-मुस्लिम का मुद्दा, मंदिर-मस्जिद का मुद्दा। और इन मुद्दों को भी बहुत सेलेक्टिव तरीके से उठाया गया।

इसका ताजा उदाहरण है आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान। मोहन भागवत ने बिहार के मुजफ्फरपुर में स्वयंसेवकों को सेना से बेहतर बताया। मोहन भागवत ने कहा कि ‘सेना को सैन्यकर्मियों को तैयार करने में छह-सात महीने लग जाएंगे, लेकिन संघ के स्वयंसेवकों को लेकर यह तीन दिन में तैयार हो जाएगी।’

पत्रकार अभिसार शर्मा ने तंज करते हुए लिखा कि, RSS प्रमुख मोहन भागवत के सेना पर दिए गए विवादित बयान पर कठिन सवाल पूछते कुछ NEWS चैनल

कथित मेनस्ट्रीम मीडिया भागवत के बायन पर चुप है। हर बात को राष्ट्रवाद के तराजू पर तौलने वाली कथित मेनस्ट्रीम मीडिया मोहन भागवत के राष्ट्रवाद पर सवाल क्यों नहीं उठा रही?

क्या मोहन भागवत ने अपने बयान से सेना का अपमान नहीं किया? अगर ओवैसी ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को भारतीय सेना से काबिल बताया होता तो आज ये मीडिया क्या ऐसे ही चुप होती?

क्या मीडिया का फर्जी राष्ट्रवाद जगह देखकर ब्लास्ट होता है? जो मीडिया जेएनयू के छात्रों को आजतक देशद्रोही कहती है वो मोहन भागवत को देशद्रोही क्यों नहीं कह रही? क्या ये मीडिया का सेलेक्टिव राष्ट्रवाद नहीं है?

मीडिया मोहन भागवत से सवाल नहीं कर रही, उल्टा ध्यान भटकाने के लिए अपना सबसे मारक तीर इस्तेमाल कर रही है। मीडिया ने मोहन भागवत के बयान से ध्यान हटाने के लिए आपकी टीवी स्क्रीन को हिंदु-मुस्लिम टॉपिक से ढक दिया है।

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