उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण पिछले पांच दिनों में करीब 63 मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अस्पताल में मरने वाले ज्यादातर मरीज बच्चे और नवजात शिशु हैं। इस मामले में प्रधानमंत्री की ओर से कोई भी बयान नहीं आया। सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि मौतें ऑक्सीजन की वजह से नहीं हुई, जबकि सच्चाई सभी के सामने है। ये सरकार की संवेदनहीनता ही है कि सरकार इस मामले में लगातार पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।

सरकार की संवेदनहीनता का दौर यहीं नहीं थमा, शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद में नजर आए, तो वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी कर्नाटक में दिखाई दिए। भाजपा नेताओं ने दोपहर तक गोरखपुर की घटना पर चुप्पी बनाई रखी।

इलाहाबाद में दो-दो केंद्रीय मंत्री गंगा सफाई के लिए आयोजित कार्यक्रम पहुंचते हैं। लेकिन, गोरखपुर में नहीं। गंगा की सफाई के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ऊमा भारती और नरेंद्र तोमर के साथ प्रदेश में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मंच साझा करते दिखाई दिेए।

गोरखपुर में पांच दिनों में 63 बच्चों की मौत होने पर भी भाजपा के नेता मंचों पर मुस्कराते हुए नजर आए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कर्नाटक में भव्य स्वागत तो यही दर्शाता है कि भाजपा के नेताओं को प्रशासन की लापरवाही के कारण बच्चों की मौत का कोई दुख नहीं है।

बात-बात पर अपने संदेश को 140 अक्षरों में समेट कर ट्विट करने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर अभी तक कोई बयान तक नहीं आया। शनिवार को दोपहर में पीएमओ की ओर से हालाकि एक ट्विट कर बताया गया कि प्रधानमंत्री गोरखपुर हादसे पर नजर बनाएं हुए हैं।

भाजपा के नेताओं की संवेदनहीनता यहीं नहीं थमी, गोरखपुर अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने शनिवार को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कुछ घंटों के लिए ऑक्सिजन की सप्लाइ जरूर बाधित हुई थी, लेकिन मौत का कारण गैस सप्लाइ में बाधा नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अगस्त में महीने में बच्चों की अक्सर मौतें ज्यादा होती हैं।

बताया जा रहा है कि, 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी। लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और शुक्रवार को सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए। शुरुआत में लेकिन सरकार का कहना है कि मीडिया में चल रही ऑक्सीजन की कमी वाली ख़बरे झूठी हैं, और तो और उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा की मीडिया में चल रही मृतकों की संख्या भी भ्रामक हैं।

उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान की चारों काफी निंदा हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं थी तो फिर अस्तपाल में ऑक्सीजन क्यों मंगवाई जा रही थी। शुक्रवार रात तक सरकार इस मामले को दबाने के लिए पर्दा डालने का काम करती रही।

इलाहाबाद में गंगा की सफाई कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर में बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं बल्कि साफ-सफाई न होने के कारण हुई। अगर बच्चों की मौत साफ-सफाई के कारण हुई, तो दो दिन पूर्व 9 अगस्त को योगी ने जब अस्पताल का दौरा किया तो अस्पताल प्रशासन को सफाई के लिए फटकार क्यों नहीं लगाई।

भाजपा की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई। लेकिन, ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी और अस्पताल प्रशासन ने पूर्व में कहा कि अस्पताल में मौतें ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई। ये सारी बातें बताती हैं कि ये सरकार ने गोरखपुर मुद्दे पर संवेदनहीनता दिखाई।

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