क्या नोटबंदी की तरह जीएसटी से तबाही के आंकड़े जल्द सामने आएँगे ?

पिछले साल 8 नवंबर की रात नोटबंदी के एक बुरे सपने ने पूरे देश को हैरान कर दिया था। प्रधानमंत्री का भाषण चलते-चलते अचानक एक घोषणा की गई कि, आज आधी रात के बाद 500 व 1000 के पुराने नोट लीगल टेंडर नहीं रह जाएंगे।

पूरा देश अपनी मेहनत की कमाई को लेकर बैंकों की लंबी-लंबी लाइनों में लग गया। सैकड़ों की जान चली गई। लाखों बेरोजगार हो गए।

देश थम गया। देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। बाजार, कंपनियां सब अपनी जगह रूक गईँ।

बीते रोज आरबीआई ने नोटबंदी पर एक रिपोर्ट पेश की। जिसमें नोटबंदी को बुरी तरह फ्लॉप मान लिया गया।

जो सरकारी दावे थे वह धरे के धरे रह गए। न कालाधन मिला न पुराने नोटों की वजह से आंतकवाद,जाली नोट व नक्सलवाद पर कोई असर पड़ा।

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 99 फीसद पुराना नोट बैंकों में जमा हो गया है। 1 फीसद से भी कम पुराना नोट जो बैंकों में नहीं आया।

नोटबंदी के अलावा जीएसटी पर भी सवाल उठ रहे हैँ। क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों औऱ तमाम कारोबारियों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है।

गुजरात के कपड़ा व्यापारियों की अनदेखी कर दी गई। तमाम विरोधों को दरकिनार कर दिया गया।

कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने सवाल किया, कहीं नोटबंदी की तरह ही जीएसटी के आंकड़ें बर्बादी वाले न हो ?

आपको बता दें कि, देश में पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार के तमाम फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं। नोटबंदी की आलोचना भी तमाम देश-विदेश के लोगों ने की थी। फिर भी सरकार ने न जनता का ख्याल रखा न देश का।

Loading...
loading...