एक तरफ घटता लिंगानुपात हरियाणा समेत पूरे देश के लिए चिंता का विषय बना है दूसरी तरफ हरियाणा की खट्टर सरकार आंकड़ों की हेर फेर करके इतने गंभीर मसले का मजाक बना रही है।

पहले प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया। फिर जब उसकी जांच हुई तो असली आंकड़े आश्चर्यजनक रूप से बहुत कम पाए गए।

सवाल उठता है कि सीएम द्वारा दिए गए ‘बेटी बचाओ’ के लिंगानुपात के आंकड़ों में यह हेराफेरी किसने करवाई थी।

ऐसी क्या वजह थी जिससे झूठे आंकड़े देने पड़े! जैसे कि पानीपत में लिंगानुपात 1007 दर्ज किया गया था लेकिन जांच करने के बाद असली आंकड़े 872 ही पाए गए । ठीक इसी तरह से नारनौल में 968 की जगह 841 , सोनीपत में 948 की जगह 870, झज्जर में 949 की जगह 845, कैथल में 939 की जगह 840, फरीदाबाद में 926 की जगह 872, और गुड़गांव में 891 की बजाए 898 ।

रोहतक से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ट्वीट करते हुए इस हेराफेरी पर सवाल उठाते हैं। साथ ही सुझाव देते हैं कि झूठे आंकड़े देने की जगह बेटियों की सुरक्षा की ओर ध्यान दें।

हरियाणा जैसे राज्य के लिए यह बात और भी संवेदनशील होनी चाहिए क्योंकि वहां का लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति में है। और ऐसे में कोई ठोस उपाय करने के बजाय अगर आंकड़ों से हेर-फेर की जाएगी तो इससे स्थिति सुधरनी तो दूर बल्कि बिगड़ती जाएगी।

यह पहला मामला नहीं है जब सरकारों पर आंकड़ों से हेर फेर करने का आरोप लगा हो। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने विकास दर के जो आंकड़े दिए थे उनके भी निर्धारक पैमाने के साथ छेड़छाड़ करके ज्यादा दिखाने का आरोप लगा था।

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