जब एकतरफ हिंदुस्तान के हर एक कोने से असहिष्णुता की खबरें आ रही हों। एक इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन बना बैठा हो। सदियों पुराना भाईचारा खतरें में हो। राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए राजनेता भड़काऊ भाषणों से भरे जलसे कर रहे हों।

ऐसे वक्त में मुंबई के धारावी से हिंदू मुस्लिम भाईचारे की एक ऐसी बानगी सुनने को मिले तो आश्चर्य ही नहीं होगा बल्कि सदियों पुराने गंगा-जमुनी तहजीब अभी भी जिंदा है ऐसा कहा जाएगा।

वही धारावी साल 1992 में सांप्रदायिक दंगे में जला। जिसकी लपटे आज भी बरकरार है। जिसके जख्म आज भी लोग भाईचारे को मजबूत करके भर रहे हैं।

मुंबई के धारावी में जब मुस्लिमों की मस्जिद में मरम्मत की बात आई तो उनके सामने नमाज अब अदा करने की मुसीबत खड़ी हो गई। तभी लाखों रुपए के किराये वाली जमीन को नमाजियों को देकर दीपक काले ने दुनिया के सामने हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश कर दी।

समाचार चैनल #ABP को दीपक काले ने कहा कि, मुझे आस पड़ोस और मेरे परिवार के लोग क्या कहेंगे इसकी कोई परवाह नहीं है। मैने अल्लाह की इबादत करने वालों को अपनी जमीन दी है। इसलिए मैं खुश हूं क्योंकि मेरी जमीन पर अच्छा काम हो रहा है।

इसके अलावा धारावी की नूर मस्जिद के सेक्रेटरी खुर्शीद अहमद बताते है कि, जब हमलोगों को मस्जिद की मरम्मत करानी थी तो हमलोगों के सामने नमाज पढ़ने की दिक्कत आ गई फिर हमलोगों ने दीपक भाई से बात की तो उन्होंने अपनी जगह हमलोगों को दे दी।

जबकि हमलोगों ने कहा कि इस जगह की सफाई हमलोग करा लेंगे लेकिन दीपक भाई ने मना कर दिया उन्होंने कहा कि, सफाई भी मैं ही कराऊंगा।

जब जब दीपक काले जैसे व्यक्ति सामने आते है। लगता है इंसानियत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अभी भी लोगों में भाईचारा जिंदा है। इंसानियत जिंदा है। जो सदियों पुरानी है। जिसे कभी खत्म नहीं किया जा सकता।

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