सांप्रदायिक हिंसा के मामले लगातार बढ़ रहें है- ऐसा अक्सर विपक्षी दल या फिर मीडिया कहता है। सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कोई कुछ भी कहें मगर ज्यादा भरोसा केंद्र सरकार आकड़ो पर ही होता है।

जैसा की हाल की रिपोर्ट में आया है उसे देखकर लगता है की सबका साथ और सबका विकास का नारा सिर्फ जुबानी जंग का शिकार होकर रह गया। क्योकिं मौजूदा आकड़ो बीजेपी शासित राज्यों में सबसे सांप्रदायिक हिंसा के मामले दर्ज किये गए जिनमें उत्तर प्रदेश ने उच्च स्थान प्राप्त किया।

दरअसल गृह मंत्रालय की तरफ से राज्यों में होने वाली सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्ट जारी किया है, जिनमें सबसे पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है। जहां जुर्म को मिटाने के लिए मुहीम चलाई जा रही है बेकसूर हो या कसूरवार उसे बीच सड़क पर गोली मार दी जा रही।

साल 2017 में सत्ता में योगी सरकार ने सड़कों के गद्दे भरें हो चाहें न भरें हो मगर सांप्रदायिक हिंसा में जो उछाल योगी सरकार के कार्यकाल में देखा जा रहा है वो वाकई चौंकाने वाला है।

योगी राज में कुल 195 मामलें दर्ज किये गए है। जिसकी तुलना अगर अखिलेश यादव की सरकार से की जाये तो अखिलेश सरकार इस मामलें में थोड़ी साफ़ दिखाई देती है।जिस तरह से कासगंज से लेकर लखनऊ कानपूर जैसे बड़े शहरों में धर्म के नाम पर जो नफरत का बीज बोया जा रहा है रिपोर्ट में उसकी झलक दिखाई भी पड़ती है।

राजे सरकार भी पीछे नहीं

पिछले दिनों एक फिल्म को करणी सेना ने जिस तरह का तांडव किया उससे ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है की राज्य की राजे सरकार कितने बेबस और लाचार दिखाई देती है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार राजे सरकार योगी सरकार के बाद स्थान प्राप्त हुआ है। आकड़ों की भाषा में कहा जाये तो राजे सरकार सांप्रदायिक हिंसा के मामलें में शतक से चुक गई है साल 2017 में राजस्थान में कुल 91 मामलें दर्ज हुए है। जोकि साल 2016 से दोगुनी है 2016 में कुल 65 सांप्रदायिक हिंसा के मामलें दर्ज किये गए थे।

शिवराज सरकार भी कम नहीं

शिवराज सिंह चौहान की सरकार में कुछ हुआ चाहें कुछ न हुआ हो मगर सांप्रदायिक हिंसा में सरकार ने सफलता हासिल की है। मध्यप्रदेश में साल 2016 में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर 57 मामलें दर्ज दिए गए थे जोकि 2017 में 3 मामलें और बढ़ गए मध्यप्रदेश में पिछले साल सांप्रदायिक हिंसा को लेकर 60 मामलें दर्ज किये गए है।

बिहार में बहार नहीं हिंसा है

नीतीश ने जब बीजेपी का साथ आरजेडी का हाथ थमा था तब उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जोरों शोरों से कहा था कि उनकी सरकार में सबसे कम सांप्रदायिक हिंसा हुई है। मगर जैसे ही नीतीश कुमार ने सत्ता में बीजेपी को शामिल किया वैसे ही सांप्रदायिक हिंसा के मामलें में नीतीश सरकार ने पिछले साल कुल 85 मामलें दर्ज हुए है जोकि 2016 (65) की तुलना में ज्यादा है।

गैर बीजेपी राज्यों में कर्नाटक दे रहा योगी सरकार को टक्कर

सांप्रदायिक हिंसा के मामलें में योगी सरकार और सिद्धरामैय्या सरकार एक दूसरे करीब तो नहीं है मगर आगे पीछे ज़रूर है। साल 2016 में कर्नाटक जहां 100 मामलें दर्ज किये गए वो 2017 में 101 रहा है। आने वालें कुछ महीनों बाद कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने है। बीजेपी लगातार इन्हीं मुद्दों को अपनी जनसभा में उठा रही है।

 

 

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