69 साल किसी व्यक्ति के जीवन के लिहाज से काफी ज्यादा होते हैं, लेकिन एक राष्ट्र के लिए यह छोटी अवधि है। इसलिए अक्सर किसी पुस्तक या लेख में भारत के विभाजन पर अफसोस जताया जाता है। कांग्रेस, मुस्लिम लीग, गांधी, जिन्ना, नेहरू, पटेल-इन सबमें से कभी किसी एक पर, तो कभी कुछ लोगों पर और कभी इन सब पर यह दोष मढ़ा जाता है कि इन्होंने भारत को एकजुट बनाए रखने की पर्याप्त कोशिश नहीं की। फिर इन पुस्तकों और लेखों में व्यापक लोकप्रिय भावनाएं परोसी जाती हैं कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोग यदि एक ही देश के नागरिक होते, तो उनकी स्थिति बेहतर होती।

69 साल से चले आ रहे इस झगडे में न जाने कितना खर्चा हुआ! पैसों का और मासूम जानों का। घर और ज़मीनें छीन ली गईं, लोगों के सपने तहस-नहस हो गए। सबसे ज़्यादा खौफनाक बात तो यह थी कि कोई किसी पर भरोसा नहीं कर पा रहा था। मुझे लगता है कि सालों से चली आ रही दुश्मनी की कुछ वजहें जाननी ज़रूरी हैं।

वजहें.
1. 1857 के क्रांतिकारी युद्ध में हिंदू-मुसलमान संगठन के बाद अंग्रेजों द्वारा रची गई ‘कूटनीति’।
2. भारत का विभाजन कराने में अंग्रेजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इसके लिए उन्होंने हिन्दू-मुसलमान के बीच हिंसा की आड़ ली। अंग्रेज चाहते थे कि भारत छोड़ने के बाद भी उसका एक भाग उसके कब्जे में रहे या वह अंग्रेजों की कठपुतली बनकर रहे।

3. साम्प्रदायिक चुनाव लागू करवाना, जिसने ‘मुस्लिम लीग’ जैसी पार्टियों को सामने ला खडा कर दिया।
4. कांग्रेस का मुस्लिम लीग को उत्तर प्रदेश में समर्थन ना देना. इस वजह से मुस्लिम लीग में डर पैदा हो गया और इसलिए मुस्लिम लीग ने कई फैसले जल्दबाज़ी में ले लिए।
बताने को तो और कई वजहें हैं लेकिन यह कुछ मुख्य वजहों में से एक थीं।

अगर भारत पाकिस्तान विभाजन ना हुआ होता तो क्या होता?

1.यदि देश का विभाजन न हुआ होता तो भारत आज विश्व का प्रथम श्रेणी का देश होता।
2. भारत के लोगों को हिंदुस्तान-पाकिस्तान विभाजन के समय जिन-जिन मुसीबतों से गुज़रना पड़ा था, उन मुसीबतों का अस्तित्व ही ना होता।
3. कारगिल युद्ध और पाकिस्तान के खिलाफ लड़े गए अन्य कई युद्धों में दोनों देशों के जवानों एवं रहवासियों की जो मौतें हुई हैं, वे शायद ना होतीं। आए दिन आतंकियों के हमले का डर काफी हद तक कम हो जाता।
4. बांग्लादेश विभाजन से हुए कष्टों से भी हम बच सकते थे।

5. कश्मीर में आज के समय में जो विवाद हो रहे हैं, उससे हिन्दुस्तान मुक्त हो सकता था।
6. हिंदुत्व और इस्लाम, दोनों सम्प्रदायों में एक दूसरे के प्रति जो बैर था, वह शायद बहुत हद तक कम हो जाता।
विभाजन या बंटवारा किसी देश, भूमि या सीमा का नहीं होता, विभाजन तो लोगों की भावनाओं का हो जाता है। विभाजन के बाद बहुत से आशियाने तबाह हुए, तो बहुत से दर्द दिलों में बसे. आज भी कई दर्द ज़िंदा हैं।