चिकनगुनिया मच्छरों से फैलने वाला एक ऐसा बुखार है, जो इंसान के शरीर के सभी जोड़ों पर असर कर शरीर को भी काफी नुकसान पहुंचाता है, और कई बार इस बीमारी से जान भी चली जाती है।आप को बता दें कि इस परेशानी से लोगों को निजात दिलाने के लिए आईआईटी रुडकी की रिसर्चर ने दवा की खोज कर ली है। अगर आईआईटी का प्रयोग सफल रहा तो जल्द मरीजों की तकलीफ दूर होगी।

आप को बता दें कि आईआईटी में बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की डॉ. शैली तोमर ने बताया कि उनकी टीम ने बाजार में मौजूद पेट के कीड़े मारने की दवा पिपराजाइन पर रिसर्च किया है। लेकिन फिलहाल बाजार में चिकनगुनिया का न तो कोई टीका मौजूद है और न ही असरकारक दवा।
रिसर्च के दौरान पता चला कि इसके वायरस एंटी चिकनगुनिया के वायरस को रोकने में बेहद असरकारक हैं। डॉ. तोमर ने बताया कि दवा पर कुछ और रिसर्च किए गए और इसके नतीजे बेहद पॉजिटिव रहें है। उन्होंने ये भी बताया कि चिकनगुनिया के वायरस से लड़ने में दवा 98% कामयाब रही है। उन्होंने बताया कि चिकनगुनिया के वायरस में एक खास किस्म का प्रोटीन होता है, जिसे कैप्सीड प्रोटीन कहते हैं। उन्होंने बताया कि दवा के जरिये लैबोरेट्री में कई तरह के मोल्यूक्यूलस (अणु) तैयार किए गए हैं।
वहीं डॉ. तोमर ने ये भी बताया कि बंदर की कोशिका पर भी इन मोलेक्यूल्स का प्रयोग किया गया। जांच में पता चला कि चिकनगुनिया के 98 फीसद तक वायरस मर चुके थे। अब इसके बाद ही क्लीनिकल ट्रॉयल किया जाएगा।

Loading...
loading...