सुप्रीम कोर्ट के जज और कोलकत्ता हाईकोर्ट जज जस्टिस कर्णन के बीच चल रहे विवाद में अब उन्हें 6 महीने की सज़ा सुना दी गई है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला उठाने वाले जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने की सजा सुनाई है। सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का दोषी करार देते हुए उन्हें ये सजा दी गई है।

गौरतलब है कि कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन ने कल ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और जस्टिस दीपक मिश्रा समेत सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी। जस्टिस कर्णन ने ये दावा किया था की इन जजों ने सामूहिक तौर पर 1989 के एससी-एसटी अट्रोसिटीज़ एक्ट और 2015 के संशोधित कानून के तहत अपराध किया है।

हालांकि जस्टिस कर्णन के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है क्योंकि उनके न्यायिक और प्रशासनिक काम करने पर रोक लगा दी गई थी। साथ ही एक मई को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दिमागी हालत की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन के आदेश दिए थे। इस मामले पर जस्टिस कर्णन का कहना है कि दलित होने के चलते उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी इसे एक दलित जज के दमन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस कर्णन के आदेश के बारे में मीडिया को कुछ ना छापने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला

जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने 20 जजों और तीन वरिष्ठ कानूनी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन पर उचित कार्रवाई का अनुरोध किया था।8 फरवरी को सात न्यायधीशों की पीठ ने इसे अदालत की अवमानना माना और उनसे स्पष्टीकरण मांगा। कर्णन को 13 फरवरी और 10 मार्च को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया लेकिन वह नहीं गए तब सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करती हुए पश्चिम बंगाल पुलिस को उन्हें 31 मार्च को पेश करने के लिए कहा था।

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