उत्तर प्रदेश में कानपुर के सिकंदरा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के अजीत पाल को विजय मिली है।

समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार सीमा सचान से 11870 वोट ज्यादा पाने वाले अजीत पाल के लिए कांग्रेस ने राह आसान कर दी, जिसने इस उपचुनाव के लिए सपा से अलग अपना उम्मीदवार उतारा ।

जहाँ भाजपा उम्मीदवार अजीत पाल 73325 मत पाकर निर्वाचित घोषित किए गए, सपा की सीमा सचान को 61455 वोट और 19090 वोट पाकर प्रभाकर पांडेय तीसरे स्थान पर रहे।

इस परिणाम के मुताबिक, सपा और कांग्रेस का साझा उम्मीदवार होता तो फिर जीत इसी गठबंधन की होती और सवाल उठने लगते कि अभी विधानसभा चुनाव में इतनी भारी जीत के बाद भाजपा अपनी जमीन क्यों खो रही है।

इस उपचुनाव के परिणाम में जो सबसे महत्वपूर्ण संकेत दिया है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने सपा कमजोर है और कांग्रेस बेहद कमजोर। राज्य की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर कुछ ऐसी ही स्थिति होगी कि भाजपा के उम्मीदवार से ज्यादा वोट उसके खिलाफ पड़ते हैं लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवारों की वजह से वोट ते हैं और भाजपा जीत जाती है।

हालांकि इस चुनाव में बसपा ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारा था तो सपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों में ही वोट बंटे।

इस चुनाव के परिणाम के राजनीतिक मायने इसलिए भी अहम हैं क्योंकि आने वाले दिनों में यूपी में 2 लोकसभा सीटों (फूलपुर और गोरखपुर) पर भी उपचुनाव होने हैं।

जहां फूलपुर से सांसद रहे स्वामी प्रसाद मौर्य राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं वही गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ अब राज्य के मुख्यमंत्री हैं इसलिए भी उपचुनाव में इन 2 सीटों पर देश भर की नजरें टिकी हुई होंगी।

अब देखना दिलचस्प होगा कि वहां पर सपा और कांग्रेस एक साथ लड़ते हैं या फिर अलग-अलग।

यहां तक कि इस बात की भी संभावना जताई जा रही है की सपा बसपा और कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं और इस चुनाव के बहाने महा गठबंधन की ताकत भी परखी जा सकेगी जो आगामी लोकसभा चुनाव में  देश की सत्ता परिवर्तन का आधार बन सकती है।

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