जिस तरह से देशभर में दहशत का माहौल है, चारों तरफ से हिंसक घटनाओं की खबर आ रही है,ये स्थिति हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे के लिए चिंताजनक है । हरियाणा में बल्लभगढ़ और नूह(मेवात) के आसपास के इलाके में न सिर्फ मातम का माहौल है बल्कि दहशत घर कर गई है। हर समय एक डर लगा रहता है कि घर से बाहर गए लोग सुरक्षित वापस आएंगे कि नहीं।

कुछ दिनों पहले गौरक्षकों ने अलवर में पहलू खान की हत्या की और अब चलती ट्रेन में जुनैद की हत्या। दोनों घटना बेहद भयावह थी , जिसमें दूसरी और भी खतरनाक। ईद के लिए खरीददारी करने गए युवक को मुस्लिम होने की वजह से मारा पीटा जाता है और चाकुओं से तब तक वार किया जाता है जब तक कि वो पूरी तरह से लहूलुहान नहीं हो जाता। कुछ देर तड़पने के बाद जुनैद की जान चली जाती है और हिंसक हो चली भीड़ के खाते में जुड़ जाती है एक और मौत।

ऐसी घटनाओं के बाद दहशत का जो माहौल बनता है उसमें आसपास के लोगों की जिंदगी बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है। जैसे पहलू खान की हत्या के बाद दूध के लिए गाय और भैंस का व्यापार करने वाले मुस्लिमों ने डर ज़ाहिर किया कि अब इस धंधे को नहीं कर पाएंगे । उसी तरह शहर गए 16 वर्षीय जुनैद की हत्या के बाद गांव के युवक अब बाहर कहीं दूर जाने से डर और घबरा रहे हैं।

घटना के बाद बोलता हिंदुस्तान की टीम बल्लभगढ़ के खंदौली गांव में गई और लोगों से बात किया। जुनैद की मौत के गम में पूरा गांव ईद के जश्न से दूर मातम की धुंध में उदासी की झपकियां ले रहा था। ऐसा लग रहा था मानो हर घर ने अपना एक बेटा खो दिया है। गलियों में घूम रहे युवाओं के मन में गुस्सा और डर था । आख़िर उन्होंने अपना भाई खोया था, एक दोस्त खोया था, जिसकी इतनी सी ग़लती थी कि वह मुसलमान था ।

गांव के लोगों से बात करने पर पता चला कि अधिकतर युवा गांव के बाहर ही पढ़ाई और कमाई के लिए जाते हैं । लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में दहशत है और अब वह बाहर जाने से मना करते हैं।

जुनैद के घर आए हुए उनके पड़ोसी कहते हैं ‘हमारे बच्चे बाहर ही पढ़ते और कमाते हैं। तीन बच्चों कि टिकट गुजरात के लिए करवा दिए हैं फिर भी वो जाने से मना कर रहे हैं । डर रहे हैं कि उनके साथ भी ऐसी घटना हो सकती है । अब वह यहीं कहीं गांव में रोजगार तलाश रहे हैं मगर यहां रोजगार का कोई अच्छा साधन नहीं है । यही हाल शिक्षा का है।’

वह आगे कहते हैं ‘बाहर तो हम भी जाया करते थे , दशकों से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे वाले समाज में रहे हैं । न जाने समाज को क्या हो गया है कि पिछले दो-तीन सालों से नफ़रत और दहशत की वजह से आपसी भाईचारा ख़त्म हो रहा है।’

आपसी भाईचारे में ज़हर घोलने वालों की ओर इशारा करते हुए एक अन्य पड़ोसी कहते हैं ‘समाज में सहिष्णुता और असहिष्णुता दोनों एक साथ रहती हैं । लेकिन जब सरकार ऐसी आ जाए कि उसके द्वारा समर्थित संगठन ही नफ़रत की राजनीति कर रहे हों तब फिर लोगों को उकसाया जाता है , असहिष्णु बनाया जाता है । किसी मजहब विशेष के खिलाफ भड़काया जाता है।’

आरएसएस , बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों का नाम लेते हुए कहते हैं कि ‘इन सभी संगठनों ने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे में ज़हर घोल रखा है। जबसे यह सरकार आई है तब से ये मनबढ़ हुए हैं।

जुनैद के घर आए हुए लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग पड़ोसी कहते हैं ‘इस देश की बुनियाद हिंदू- मुस्लिम भाईचारे पर टिकी है। दहशतगर्दों को खबरदार हो जाना चाहिए कि वो किसी भी दिन बेनकाब हो जाएंगे। उनकी नफ़रत की ये राजनीति बहुत लंबे दौर तक नहीं चलेगी । हम फिर से अमन चैन कायम करने में कामयाब होंगे।’

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