भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने अंतरिम रोक लगा दी है. इसके पहले जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी.

10 अप्रैल को जाधव को सजा सुनाये जाने के बाद से ही भारत में इसका विरोध हो रहा है. भारत सरकार ने पाकिस्तान सैन्य अदालत के इस फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट  अपील की थी. जाधव की माँ ने भी पाकिस्तान के उच्च अदालत में फांसी पर रोक लगाए जाने की मांग की थी. बीते रात आए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद  विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर सूचित किया कि उन्होंने यह फैसला कुलभूषण जाधव की माँ से साझा किया.

पाकिस्तान का दावा है कि जाधव को पिछले साल 3 मार्च को निर्विवाद बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया था. पाकिस्तान के फिल्ड जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा पिछले महीने जाधव को मौत की सजा सुनाई गई थी. इसे लेकर भारत ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी और कोस्टगार्ड स्तर की बातचीत को स्थगित कर गया था. भारत ने इसे ‘सोच समझ कर की जाने वाली हत्या’ कहा था. साथ ही भारत-पाकिस्तान संबंधों में खटास और परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी.

पाकिस्तान का जाधव पर आरोप है कि वह इंटेल एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग या रॉ के लिए एक जासूस के तौर पर काम कर रहे थे. पाकिस्तान ने यह भी दावा किया है कि वह “भारतीय नौसेना में एक सेवारत अधिकारी” हैं और बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों में शामिल थे.

भारत ने इस दावे को खारिज करता रहा है और कहता  है कि एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी जाधव का ईरान से अपहरण कर लिया गया था, जहां वह एक व्यवसाय चला रहे थे. भारत ने पाकिस्तान पर विएना सम्मलेन के समझौतों को नहीं मानने का आरोप लगाया था.

 

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