केंद्र सरकार ने फेसबुक और ट्विटर के साथ 22 वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.

जम्मू कश्मीर में चल रहे सोशल मीडिया प्रतिबंध पर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने नाराज़गी जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र ने भारत सरकार से कहा है कि जम्मू कश्मीर में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाया जाए. यूएन ने इस प्रतिबंध को बोलने की आज़ादी के खिलाफ़ बताया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्च आयुक्त द्वारा जारी और प्रकाशित एक बयान में कहा गया कि यह एक ‘सामूहिक सजा’ है. बोलने और विचार रखने की आज़ादी पर अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा नहीं करता है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के दो विशेषज्ञों द्वारा लिखी गई रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इन प्रतिबंधों के दायरे में कश्मीर में हर किसी के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. सूचना के प्रचार प्रसार पर इस तरह रोक लगाने से हिंसा भी हो सकती है.

घाटी में पिछले महीने सेना बलों द्वारा युवक को जीप पर बांधने के बाद से स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों में टकराव बढ़ा है. 17 अप्रैल को सरकार ने सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक और ट्विटर के अलावा अन्य 22 वेबसाइट पर प्रतिबंध लगा दिया था.

सेना की जीप पर बंधा हुआ कश्मीरी युवक (फोटो: Parstoday.com)

यह भी बात सामने आई है कि इस प्रतिबंध का कोई ख़ासा असर नहीं हो रहा है, क्योंकि कश्मीर के लोग वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके इस्तेमाल से सरकार द्वारा प्रतिबंधित वेबसाइट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर में 2012 से सोशल मीडिया और इंटरनेट प्रतिबंधों के 31 मामले सामने आए है. जो इस क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और सामाजिक अशांति को रोकने के लिए सरकारों द्वारा लगाया गया है.

मानव अधिकार रक्षक मिशेल फोर्स्ट ने स्पेशल रिपोर्टर ने कहा, ‘इस तरह के प्रतिबंध से विचारों के मुफ़्त आदान-प्रदान में बाधा आ गई है और एक दूसरे के साथ जुड़ने और व्यक्तियों की क्षमता साझा करने के विषय से यह मामला जुड़ा हुआ है.’

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